Home > धर्म > श्रृंगी ऋषि धाम… जहां भगवान राम समेत चारों भाइयों का हुआ था मुंडन संस्कार, कुंड में स्नान से मिटते हैं रोग!

श्रृंगी ऋषि धाम… जहां भगवान राम समेत चारों भाइयों का हुआ था मुंडन संस्कार, कुंड में स्नान से मिटते हैं रोग!

Shringi Rishi Dham: भारत में ऐसे अनेक धार्मिक स्थल हैं, जिनका संबंध सीधे भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ा हुआ है. इन्हीं में से एक है बिहार के लखीसराय जिले का श्रृंगी ऋषि धाम. इसको आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम माना जाता है. मान्यता है कि इसी पावन स्थान पर राजा दशरथ ने अपने चारों पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का मुंडन यहीं कराया था. पढ़िए मंदिर से जुड़ी रोचक पौराणिक कथा-

By: Lalit Kumar | Published: July 28, 2026 10:57:29 AM IST



Shringi Rishi Dham: भारत में ऐसे अनेक धार्मिक स्थल हैं, जिनका संबंध सीधे भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ा हुआ है. इन्हीं में से एक है बिहार के लखीसराय जिले का श्रृंगी ऋषि धाम. इसको आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम माना जाता है. मान्यता है कि इसी पावन स्थान पर पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने यज्ञ किया था. फिर भगवान राम सहित चारों पुत्र के अवतरित होने के बाद राजा दशरथ ने अपने चारों पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का मुंडन यहीं कराया था. श्रृंगी ऋषि धाम की पहाड़ियां, झरने और कुंड आकर्षण का केंद्र है. यहां स्थित प्राचीन पवित्र कुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों सहित कई शारीरिक कष्ट दूर होने की भी लोकमान्यता है. यही वजह है कि हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन और स्नान के लिए पहुंचते हैं. पढ़िए मंदिर से जुड़ी रोचक पौराणिक कथा-

कौन थे श्रृंगी ऋषि

पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रृंगी ऋषि महान तपस्वी और विद्वान ऋषि थे. उनका विवाह महाराज दशरथ की दत्तक पुत्री शांता से हुआ था. यही श्रृंगी ऋषि थे जिन्होंने राजा दशरथ की संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण करने के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न कराया था. इसी यज्ञ के फलस्वरूप भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ. इसलिए श्रृंगी ऋषि का स्थान रामायण की कथा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है.

श्रृंगी ऋषि में हुआ मुंडन संस्कार

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम और उनके तीनों भाइयों के जन्म के बाद महाराज दशरथ उन्हें श्रृंगी ऋषि के आश्रम लेकर आए थे. यहीं वैदिक परंपरा के अनुसार चारों राजकुमारों का मुंडन संस्कार संपन्न कराया गया. इस कारण यह स्थान राम भक्तों के लिए विशेष श्रद्धा का केंद्र बन गया है.

बिहार के लखीसराय जिले का श्रृंगी ऋषि धाम.  (Image- MK Verma)

पवित्र कुंड में स्नान से दूर होते रोग

श्रृंगी ऋषि धाम का सबसे प्रमुख आकर्षण यहां स्थित प्राचीन पवित्र कुंड है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस कुंड के जल में स्नान करने से त्वचा रोग, फोड़े-फुंसियां और अन्य शारीरिक समस्याओं से राहत मिलती है. हालांकि, इन दावों को धार्मिक आस्था और स्थानीय मान्यता के रूप में ही देखा जाता है. फिर भी बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा के साथ यहां स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं.

झरना-पहाड़ और हरियाली मोह लेती मन

धाम के पास बहने वाला झरना, हरियाली से घिरा शांत वातावरण और प्राचीन आश्रम परिसर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचता है. सावन, रामनवमी और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष मेले और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं.

श्रृंगी ऋषि धाम से जुड़ी रोचक कथा

मान्यता है कि राजा दशरथ को पुत्र नहीं होने पर उन्होंने गुरु वशिष्ठ से सुझाव मांगा. तब गुरु वशिष्ठ ने राजा दशरथ को भिक्षुक के वेश में ऋषि विभांडक के पुत्र ऋषि श्रृंग के पास जाने की सलाह दी. वहां अपनी परेशानी बताने पर ऋषि श्रृंग ने तपस्या की थी. तपस्या के उपरांत अग्निदेवता खीर का कटोरा लेकर प्रकट हुए और उसी खीर को राजा की तीनों रानियों को खिलाया.

राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के अवतरित होने के बाद गुरु वशिष्ठ ने सबों का नामाकरण किया, लेकिन मुंडन कार्य इसी श्रृंगी ऋषि धाम में हुआ था. यही नहीं ये मुगल साम्राज्य के राजाओं का भी मुंडन स्थल माना जाता है. यही वजह है कि यहां छठ पूजा के बाद अपने पुत्र के मुंडन को लेकर लोगों की अपार भीड़ देखी जाती है.

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