Kya Mahilaye Shivling Ko Chhu Sakti Hain: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस पूरे महीने शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. हालांकि शिव पूजा से जुड़े कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है.
क्या महिलाएं शिवलिंग का स्पर्श कर सकती हैं?
शिवलिंग को लेकर समाज में लंबे समय से यह धारणा प्रचलित है कि महिलाएं विशेषकर शिवलिंग को स्पर्श नहीं कर सकतीं. लेकिन धार्मिक विद्वानों और धर्मग्रंथों के अनुसार यह मान्यता शास्त्रसम्मत नहीं मानी जाती.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पुराण सहित किसी भी प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथ में महिलाओं को शिवलिंग का स्पर्श करने या जलाभिषेक करने से नहीं रोका गया है. स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. इसलिए महिलाओं द्वारा श्रद्धापूर्वक शिवलिंग का अभिषेक करना धार्मिक दृष्टि से निषिद्ध नहीं माना गया है.
शिवलिंग क्यों माना जाता है शिव और शक्ति का संयुक्त स्वरूप?
हिंदू धर्म में शिवलिंग केवल भगवान शिव का ही नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती यानी शक्ति के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण इसमें स्त्री और पुरुष का कोई भेद नहीं माना जाता. भगवान शिव की भक्ति में सभी भक्त समान माने गए हैं, चाहे वे महिला हों या पुरुष.
माता पार्वती ने भी किया था शिवलिंग का पूजन
धार्मिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी. उन्होंने विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना की और शिवलिंग का जलाभिषेक भी किया. यही कारण है कि कई विद्वान इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि महिलाओं के शिवलिंग पूजन पर किसी प्रकार का धार्मिक प्रतिबंध नहीं है.
शिव पूजा में सबसे जरूरी है पवित्रता और श्रद्धा
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि भगवान शिव की पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा, आस्था और पवित्रता का होता है. चाहे स्त्री हो या पुरुष, दोनों को स्वच्छता और शुद्ध मन से ही शिवलिंग का स्पर्श और जलाभिषेक करना चाहिए. भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है, क्योंकि वे सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और अपने सभी भक्तों पर समान कृपा बरसाते हैं. देश के कई प्रसिद्ध शिव मंदिरों में महिलाओं को शिवलिंग का अभिषेक करने की अनुमति है. उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित अनेक शिवालयों में महिलाएं भी पुरुषों की तरह भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करती हैं. इससे भी स्पष्ट होता है कि महिलाओं के शिवलिंग स्पर्श पर कोई सार्वभौमिक धार्मिक प्रतिबंध नहीं है.
भगवान शिव की पूजा में किन चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए?
धर्मग्रंथों में भगवान शिव की पूजा के दौरान कुछ वस्तुओं को अर्पित करने की मनाही बताई गई है. इनमें प्रमुख रूप से-
- तुलसी के पत्ते
- केतकी का फूल
- शंख से जल अर्पित करना
- सुहाग सामग्री (जैसे सिंदूर, चूड़ी आदि)
इन वस्तुओं को शिव पूजन में प्रयोग नहीं किया जाता. वहीं गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और शुद्ध जल से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
शिव पूजा में आस्था के साथ शास्त्रीय नियमों का भी रखें ध्यान
सावन में भगवान शिव की पूजा करते समय श्रद्धा के साथ-साथ धार्मिक नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है. शास्त्रों के अनुसार महिलाओं और पुरुषों दोनों को समान रूप से शिव भक्ति का अधिकार है. इसलिए किसी भी सामाजिक भ्रम के बजाय धर्मग्रंथों और विद्वानों की बातों को समझकर ही पूजा करनी चाहिए.