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लंका पहुंचने पर हनुमान जी सबसे पहले किससे मिले थे? जिसने बताया अशोक वाटिका का रास्ता, जहां थीं माता सीता

Ramayana Story: हनुमान जी समुद्र पार कर जब वे सोने की नगरी लंका पहुंचे तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, कड़े पहरे और मायावी राक्षसों के बीच माता सीता का पता लगाना. इसी बीच उन्हें लंका में एक ऐसा धर्मनिष्ठ व्यक्ति मिला जिसने न केवल उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया, बल्कि अशोक वाटिका का रास्ता भी बताया, जहां माता सीता विराजमान थीं. अब सवाल है कि आखिर, लंका पहुंचने पर हनुमान जी सबसे पहले किससे मिले थे? पढ़िए रोचक कथा-

By: Lalit Kumar | Published: July 9, 2026 1:21:27 PM IST



Ramayana Story: सनातन धर्म की महाकाव्य रामायण तमाम रोचक प्रसंगों से भरी पड़ी है. इसमें कुछ अनसुने प्रसंग वास्तव में सोचने पर मजबूर कर देते हैं. ऐसा ही एक प्रसंग हनुमान जी के लंका पहुंचने से जुड़ा है. बता दें कि, हनुमान जी का लंका प्रवेश केवल साहस और पराक्रम की कहानी नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता, भक्ति और नियति का भी अद्भुत प्रसंग है. समुद्र पार कर जब वे सोने की नगरी लंका पहुंचे तब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, कड़े पहरे और मायावी राक्षसों के बीच माता सीता का पता लगाना. इसी बीच उन्हें लंका में एक ऐसा धर्मनिष्ठ व्यक्ति मिला जिसने न केवल उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया, बल्कि अशोक वाटिका का रास्ता भी बताया, जहां माता सीता विराजमान थीं. यही व्यक्ति आगे चलकर भगवान श्रीराम का सबसे बड़ा सहयोगी बना. अब सवाल है कि आखिर, लंका पहुंचने पर हनुमान जी सबसे पहले किससे मिले थे? जिन्होंने अशोक वाटिका का रास्ता बताया? पढ़िए रोचक कथा-  

लंका में कैसे हुई विभीषण से मुलाकात?

वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड के अनुसार, हनुमान जी रात के समय सूक्ष्म रूप धारण कर लंका में प्रवेश करते हैं. वे पूरे नगर में माता सीता की खोज करते हैं, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चलता है. इसी दौरान उन्हें एक ऐसा घर दिखाई देता है, जहां भगवान विष्णु के चिह्न, तुलसी का पौधा और सात्विक वातावरण था. यह देखकर हनुमान जी समझ गए कि यहां कोई धर्मात्मा व्यक्ति रहता है. यही घर किसी और का नहीं, बल्कि लंकापति रावण के छोटे भाई विभीषण का था. 

लंका पहुंचने पर हनुमान जी सबसे पहले किससे मिले थे? जिसने बताया अशोक वाटिका का रास्ता, जहां थीं माता सीता

हनुमान और विभीषण की पहली बातचीत

हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप धारण कर विभीषण से बातचीत की. बातचीत के दौरान दोनों ने एक-दूसरे की पहचान की. जब विभीषण को पता चला कि हनुमान जी भगवान श्रीराम के दूत हैं, तो उन्होंने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया. विभीषण ने बताया कि माता सीता रावण के महल में नहीं, बल्कि अशोक वाटिका में कड़ी सुरक्षा के बीच रखी गई हैं. उन्होंने, वहां तक पहुंचने का मार्ग भी हनुमान जी को बताया.

अशोक वाटिका तक कैसे पहुंचे?

विभीषण के बताए मार्ग पर चलते हुए हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचे. वहां उन्होंने एक वृक्ष पर बैठकर माता सीता को देखा, जो श्रीराम के वियोग में अत्यंत दुखी थीं. उचित अवसर देखकर हनुमान जी ने भगवान श्रीराम की अंगूठी उन्हें दी और विश्वास दिलाया कि श्रीराम शीघ्र ही उन्हें मुक्त कराने आएंगे.

यही मुलाकात राम से मित्रता का बना आधार

यदि विभीषण हनुमान जी को अशोक वाटिका का मार्ग न बताते, तो माता सीता तक पहुंचना और भी कठिन हो सकता था. यही पहली मुलाकात आगे चलकर श्रीराम और विभीषण की मित्रता का आधार बनी. बाद में विभीषण ने रावण का साथ छोड़कर धर्म का मार्ग चुना और लंका विजय में भगवान श्रीराम की महत्वपूर्ण सहायता की.

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