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अयोध्या छोड़ने के बाद श्रीराम किस वन में रुके थे? सीता सुरक्षा के लिए क्या सचमुच लक्ष्मण ने खींची थी ‘लक्ष्मण रेखा’, पढ़िए कथा

Ramayana Katha: आमतौर पर लोगों का मानना है कि, माता सीता की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण ने कुटिया के बाहर एक दिव्य रेखा खींची थी, जिसे पार करते ही रावण उनका हरण कर ले गया. लेकिन, क्या यह घटना वास्तव में वाल्मीकि रामायण में वर्णित है?

By: Lalit Kumar | Published: July 23, 2026 2:02:09 PM IST



Ramayana Katha: सनातन के सबसे बड़े महाकाव्य रामायण तमाम रोचक प्रसंगों का खजाना है. इसका नाम आते ही कई प्रसंग ऐसे हैं, जो सदियों से लोगों की आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बने हुए हैं. इन्हीं में से एक है लक्ष्मण रेखा का प्रसंग. आमतौर पर लोगों का मानना है कि, माता सीता की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण ने कुटिया के बाहर एक दिव्य रेखा खींची थी, जिसे पार करते ही रावण उनका हरण कर ले गया. लेकिन, क्या यह घटना वास्तव में वाल्मीकि रामायण में वर्णित है? वहीं, एक सवाल यह भी उठता है कि अयोध्या से वनवास के लिए निकलने के बाद भगवान श्रीराम ने सबसे पहले किस वन में निवास किया था. आज हम रामायण के इन्हीं प्रसंगों से जुड़ी रोचक कथाओं के बारे में बात करेंगे.

अयोध्या छोड़ने के बाद श्रीराम सबसे पहले कहां पहुंचे?

14 वर्ष का वनवास मिलने के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण सबसे पहले अयोध्या से निकलकर तमसा नदी के तट पर रुके. वहां से वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जहां निषादराज गुह ने उनका स्वागत किया. इसके बाद उन्होंने महर्षि भारद्वाज से प्रयाग क्षेत्र में भेंट की और उनके मार्गदर्शन में चित्रकूट पहुंचे. इस तरह से चित्रकूट का वन भगवान श्रीराम के वनवास का पहला प्रमुख निवास स्थान माना जाता है. 

माता जानकी संग श्रीराम ने पर्णकुटी में किया निवास

चित्रकूट के वन में भगवान श्रीराम ने भाई लक्ष्मण के साथ मिलकर एक पर्णकुटी बनाई, जिसमें कुछ समय तक उन्होंने निवास किया. बता दें कि, चित्रकूट में ही भरत उनसे मिलने आए और अयोध्या लौटकर राजगद्दी संभालने का आग्रह किया. हालांकि, श्रीराम ने पिता दशरथ को दिए वचन का पालन करते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय लिया.

फिर दंडकारण्य पहुंचे भगवान श्री राम, सीता और लक्ष्मण

चित्रकूट छोड़ने के बाद श्रीराम, सीता और लक्ष्मण दक्षिण दिशा की ओर बढ़े और दंडकारण्य वन पहुंचे. यह विशाल वन वर्तमान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों तक फैला है. यहीं उन्होंने कई ऋषियों के आश्रमों का भ्रमण किया और राक्षसों से उनकी रक्षा की. बाद में वे पंचवटी पहुंचे, जो वर्तमान महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में स्थित मानी जाती है. यहीं भगवान श्रीराम ने अपनी कुटिया बनाई और लंबे समय तक निवास किया.

क्या सचमुच लक्ष्मण ने खींची थी लक्ष्मण रेखा?

लोककथाओं और रामलीलाओं में लक्ष्मण रेखा का प्रसंग बेहद प्रसिद्ध है. माना जाता है कि, जब मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर श्रीराम को दूर ले गया और बाद में उसकी आवाज सुनकर सीता ने लक्ष्मण को भी भेज दिया, तब लक्ष्मण ने कुटिया के चारों ओर एक सुरक्षा रेखा खींच दी और माता सीता से उसे पार न करने का आग्रह किया.

लेकिन, वाल्मीकि रामायण में लक्ष्मण रेखा का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता. इस प्रसंग का विस्तृत वर्णन बाद की कई रामायणों, विशेष रूप से रामचरितमानस की लोकव्याख्याओं, क्षेत्रीय रामायणों और लोक परंपराओं में मिलता है. इसलिए कई विद्वान मानते हैं कि लक्ष्मण रेखा का प्रसंग लोकश्रुति के माध्यम से अधिक लोकप्रिय हुआ.

रावण ने कैसे किया माता सीता का हरण?

जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण कुटिया से दूर थे, तब रावण साधु का वेश धारण कर पंचवटी पहुंचा. उसने भिक्षा मांगने के बहाने माता सीता को कुटिया से बाहर आने के लिए विवश किया. इसके बाद उसने अपना वास्तविक रूप धारण किया और माता सीता का हरण कर पुष्पक विमान से लंका ले गया. रास्ते में जटायु ने उनका साहसपूर्वक सामना किया, लेकिन रावण ने उन्हें घायल कर दिया.

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