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पिछले जन्म में शबरी कौन थीं? जिसके झूठे बेर श्रीराम ने खाए, किस श्राप की वजह से बनीं वनवासी, रोचक है भक्ति की कहानी

Shabari Previous Birth Story: न धन की इच्छा, न राजपाट की चाह और न किसी बड़े वरदान की लालसा. बस एक विश्वास कि, 'मेरे राम एक दिन जरूर आएंगे. ऐसी ही एक कथा शबरी के अटूट विश्वास से जुड़ी है. वही शबरी...जिसके झूठे बेर भगवान राम ने बहुत ही प्यार से खाए थे. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि, शबरी अपने पिछले जन्म में कौन थीं? भगवान राम को शबरी ने झूठे बेर क्यों खिलाए?

By: Lalit Kumar | Published: August 5, 2026 6:03:24 PM IST



Shabari Previous Birth Story: कल्पना कीजिए.., एक भक्त के जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य सिर्फ इतना हो कि वह अपने आराध्य के दर्शन कर सके. न धन की इच्छा, न राजपाट की चाह और न किसी बड़े वरदान की लालसा. बस एक विश्वास कि, ‘मेरे राम एक दिन जरूर आएंगे. ऐसी ही एक कथा शबरी के अटूट विश्वास से जुड़ी है. वही शबरी…जिसके झूठे बेर भगवान राम ने बहुत ही प्यार से खाए थे. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि, शबरी अपने पिछले जन्म में कौन थीं? भगवान राम को शबरी ने झूठे बेर क्यों खिलाए? शबरी किस श्राप की वजह से वनवासी बनीं? पढ़िए भक्त और भगवान की रोचक कहानी- 

पिछले जन्म में कौन थीं शबरी?

धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, शबरी पिछले जन्म में मालिनी नाम की स्त्री थीं. कथा के एक रूप में उन्हें गंधर्व राजा की पुत्री बताया गया है. एक प्रसंग में ऋषि विठिहोत्र के श्राप के कारण उन्हें अगले जन्म में वनवासी स्त्री के रूप में जन्म लेना पड़ा. हालांकि, यह कथा वाल्मीकि रामायण के मूल कथानक का हिस्सा नहीं मानी जाती, इसलिए इसे धार्मिक परंपरा के रूप में देखना उचित है.

मतंग ऋषि की शिष्या बनीं शबरी

अगले जन्म में शबरी ने अपना जीवन आध्यात्मिक साधना और सेवा को समर्पित कर दिया. उनकी मुलाकात मतंग ऋषि से हुई फिर बाद में वह उनकी शिष्या बन गईं. उन्होंने वर्षों तक आश्रम की सेवा की. मतंग ऋषि शबरी की श्रद्धा से बेहद प्रसन्न थे. कथा के अनुसार, जब ऋषि को अपनी देह त्यागने का समय निकट लगा तो उन्होंने शबरी से कहा कि वह आश्रम में रहकर श्रीराम की प्रतीक्षा करें, क्योंकि एक दिन राम स्वयं वहां आएंगे. इसके बाद शबरी के जीवन का हर दिन राम की प्रतीक्षा में बीतने लगा.

श्रीराम के लिए सालों तक रोज सजाती थीं आश्रम

शबरी का इंतजार किसी तारीख या समय का इंतजार नहीं था. वह रोज आश्रम साफ करतीं, रास्ते को व्यवस्थित करतीं और जंगल से फल-फूल लाकर रखतीं. उम्र बढ़ती गई, शरीर कमजोर होता गया, लेकिन श्रीराम के आने का विश्वास कभी कमजोर नहीं पड़ा. आखिरकार सीता की खोज करते हुए श्रीराम और लक्ष्मण मतंग ऋषि के आश्रम पहुंचे. 

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, शबरी ने दोनों भाइयों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया और उन्हें अपने आश्रम तथा वहां रहने वाले ऋषियों के बारे में बताया. इसके बाद उन्होंने योगाग्नि के माध्यम से अपना शरीर त्यागकर दिव्य लोक की ओर प्रस्थान किया.

क्या सच में श्रीराम ने खाए थे शबरी के झूठे बेर?

शबरी की कहानी का सबसे लोकप्रिय प्रसंग उनके चखे हुए बेर हैं. लोककथा में कहा जाता है कि, शबरी हर बेर को पहले चखती थीं और मीठा होने पर ही श्रीराम को देती थीं. राम ने उनके प्रेम को स्वीकार करते हुए बेर खाए. हालांकि, वाल्मीकि रामायण में शबरी द्वारा बेर चखकर श्रीराम को खिलाने का स्पष्ट वर्णन नहीं मिलता है. यह प्रसंग बाद की धार्मिक परंपराओं और कुछ अन्य ग्रंथीय स्रोतों में मिलता है. 

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