Piluwa Hanuman Mandir Story: क्या आपने कभी ऐसे हनुमान मंदिर के बारे में सुना है, जहां अंजनी पुत्र लड्डू खाते हैं और दूध भी पीते हैं. भक्त बजरंगबली को लड्डू और दूध का भोग लगाते हैं और दावा करते हैं कि प्रसाद उनकी आंखों के सामने गायब हो जाता है? इतना ही नहीं, यहां संकटमोचन हनुमान की प्रतिमा बैठी या खड़ी मुद्रा में नहीं, बल्कि लेटी हुई अवस्था में विराजमान है. यह अनोखा मंदिर अपनी इसी विशेषता के कारण श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहता है. उत्तर प्रदेश के इटावा क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे स्थित पिलुआ हनुमान मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. भक्तों के लिए यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का केंद्र है. आइए जानते हैं इस प्राचीन मंदिर की खासियत और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में.
करीब 700 साल पुराना है पिलुआ हनुमान मंदिर
इटावा जिला मुख्यालय से दस किलोमीटर दूर रुरा गांव के बीहड़ में यमुना नदी किनारे स्थित पिलुआ हनुमान मंदिर को एक प्राचीन सिद्ध पीठ माना जाता है. मान्यता है कि यह मंदिर करीब 700 साल पुराना है. कहा जाता है कि, पहले यहां हनुमान जी की प्रतिमा पिलुआ के पेड़ के नीचे स्थापित थी. बाद में श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से यहां मंदिर का निर्माण हुआ.
कैसे पड़ा इस मंदिर का नाम पिलुआ
क्षेत्र में पिलुआ के पेड़ों की अधिकता के कारण मंदिर का नाम पिलुआ हनुमान मंदिर पड़ा. समय के साथ यह स्थान स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.
लेटी मुद्रा में विराजमान हैं बाल हनुमान
इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा है. बजरंगबली यहां बाल स्वरूप में लेटी हुई मुद्रा में हैं. प्रतिमा का मुंह खुला है, जिसे लेकर भक्तों के बीच विशेष मान्यता प्रचलित है. आमतौर पर हनुमान मंदिरों में उनकी खड़ी, बैठी या वीर मुद्रा वाली प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन पिलुआ मंदिर में उनका यह स्वरूप श्रद्धालुओं की जिज्ञासा बढ़ाता है. भक्त इस प्रतिमा के दर्शन कर सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं.
लड्डू और दूध का भोग क्यों है खास?
पिलुआ हनुमान मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता दूध और लड्डू के भोग को लेकर है. स्थानीय श्रद्धालुओं का दावा है कि, हनुमान जी को चढ़ाया गया दूध और लड्डू प्रतिमा के खुले मुंह से भीतर चला जाता है. इसी वजह से इस मंदिर को लेकर भक्तों के बीच विशेष उत्सुकता बनी रहती है. इस घटना को श्रद्धालु बजरंगबली का चमत्कार मानते हैं. हालांकि, इस दावे के पीछे केवल आस्था है.
दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु
पिलुआ हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती, मंगलवार और शनिवार जैसे अवसरों पर भक्त विशेष श्रद्धा के साथ दर्शन करने पहुंचते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु बजरंगबली को सिंदूर, फूल, लड्डू और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं.