Home > धर्म > Mangala Gauri Vrat Katha 2026: 4 अगस्त को है मंगला गौरी व्रत,  जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और धरमपाल व उनके पुत्र से जुड़ी पौराणिक व्रत कथा

Mangala Gauri Vrat Katha 2026: 4 अगस्त को है मंगला गौरी व्रत,  जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और धरमपाल व उनके पुत्र से जुड़ी पौराणिक व्रत कथा

Mangala Gauri Vrat Katha 2026: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा. यह व्रत माता पार्वती को समर्पित माना जाता है और विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए इसे करती हैं.

By: Shivashakti Narayan Singh | Published: August 3, 2026 6:22:38 PM IST



Mangala Gauri Vrat Katha 2026: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026, मंगलवार को रखा जाएगा. यह व्रत माता पार्वती को समर्पित माना जाता है और विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए इसे करती हैं.

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और मंगला गौरी व्रत कथा सुनने या पढ़ने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है. इस बार व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं.

 मंगला गौरी व्रत का शुभ पूजा मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त रहेंगे. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:16 बजे से 5:52 बजे तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:26 बजे से 2:26 बजे तक और विजय मुहूर्त शाम 4:26 बजे से 5:26 बजे तक रहेगा. पूजा के दौरान माता गौरी को सोलह श्रृंगार अर्पित करना शुभ माना जाता है.

 मंगला गौरी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में धरमपाल नाम का एक धनवान व्यापारी अपनी पत्नी के साथ रहता था. धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण दोनों हमेशा दुखी रहते थे. भगवान की कृपा से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई, लेकिन ज्योतिषियों ने बताया कि उसकी आयु केवल 16 वर्ष है और उसकी मृत्यु सांप के डसने से होगी.समय बीता और पुत्र का विवाह एक ऐसी कन्या से हुआ, जिसकी मां वर्षों से श्रद्धापूर्वक मंगला गौरी व्रत करती थीं. माता गौरी की कृपा से उस कन्या को अखंड सौभाग्य का वरदान मिला था और उसके भाग्य में वैधव्य नहीं लिखा था.जब धरमपाल के पुत्र की 16 वर्ष की आयु पूरी होने का समय आया, तब नियति के अनुसार सांप उसे डसने पहुंचा. लेकिन मंगला गौरी व्रत के प्रभाव और माता गौरी की कृपा से उसकी मृत्यु टल गई. मान्यता है कि उसी आशीर्वाद के कारण धरमपाल का पुत्र 100 वर्ष तक जीवित रहा.इसी घटना के बाद मंगला गौरी व्रत की महिमा चारों ओर फैल गई. तभी से विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं.

 कथा सुनने के बाद क्या करें?

धार्मिक परंपरा के अनुसार, कथा पूरी होने के बाद सुहागिन महिलाएं अपनी सास और ननद को 16 लड्डुओं का प्रसाद देती हैं. इसके बाद ब्राह्मण को भी प्रसाद अर्पित किया जाता है. फिर 16 बातियों वाले दीपक से माता गौरी की आरती की जाती है. अगले दिन बुधवार को माता गौरी की प्रतिमा का नदी, तालाब या किसी पवित्र जलाशय में विसर्जन किया जाता है. अंत में पूजा में हुई भूल-चूक के लिए माता से क्षमा प्रार्थना की जाती है.

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