Home > धर्म > महाभारत का वो योद्धा… जिसे मिला था इच्छा मृत्यु का वरदान! फिर भी श्रीकृष्ण ने क्यों नहीं बचाया उसका जीवन?

महाभारत का वो योद्धा… जिसे मिला था इच्छा मृत्यु का वरदान! फिर भी श्रीकृष्ण ने क्यों नहीं बचाया उसका जीवन?

Mahabharat Untold Story: महाभारत में कई ऐसे योद्धाओं की कहानियां हैं, जिनके पास अद्भुत शक्तियां और वरदान थे. लेकिन एक योद्धा ऐसा भी था, जिसे अपनी मृत्यु का समय चुनने का वरदान मिला था. वह थे भीष्म पितामह. कुरुक्षेत्र में जब वे बाणों की शय्या पर पड़े थे, तब श्रीकृष्ण स्वयं उनके सामने मौजूद थे. फिर भी कृष्ण ने उन्हें मृत्यु से क्यों नहीं बचाया?

By: Lalit Kumar | Last Updated: August 29, 2026 8:43:39 AM IST



Mahabharat Untold Story: महाभारत में कई ऐसे योद्धाओं की कहानियां हैं, जिनके पास अद्भुत शक्तियां और वरदान थे. लेकिन एक योद्धा ऐसा भी था, जिसे अपनी मृत्यु का समय चुनने का वरदान मिला था. वह थे भीष्म पितामह. कुरुक्षेत्र में जब वे बाणों की शय्या पर पड़े थे, तब श्रीकृष्ण स्वयं उनके सामने मौजूद थे. फिर भी कृष्ण ने उन्हें मृत्यु से क्यों नहीं बचाया? इसके पीछे धर्म, प्रतिज्ञा और इच्छा-मृत्यु की बेहद रोचक कथा है.

महाभारत के सबसे सम्मानित योद्धाओं में भीष्म पितामह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. वे हस्तिनापुर के कुरुवंश के महान योद्धा और नीति के ज्ञाता थे. उनके पिता राजा शांतनु थे. भीष्म ने अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का कठोर व्रत लिया था. उनके इसी त्याग के कारण उन्हें ‘भीष्म’ नाम मिला.

मिला था इच्छा-मृत्यु का वरदान

महाभारत की कथा के अनुसार, भीष्म की कठोर प्रतिज्ञा से प्रसन्न होकर उनके पिता शांतनु ने उन्हें इच्छा-मृत्यु का वरदान दिया था. इसका अर्थ था कि भीष्म अपनी मृत्यु का समय स्वयं चुन सकते थे. कुरुक्षेत्र युद्ध में भीष्म कौरवों की ओर से सेनापति बने. वे जानते थे कि पांडवों के विरुद्ध लड़ना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि पांडव भी उनके प्रिय थे. फिर भी उन्होंने हस्तिनापुर के सिंहासन के प्रति अपनी प्रतिज्ञा के कारण कौरव सेना का नेतृत्व किया.

बाणों की शय्या पर पहुंचे भीष्म

युद्ध के दसवें दिन अर्जुन ने शिखंडी को आगे करके भीष्म पर बाणों की वर्षा की. शिखंडी को देखकर भीष्म ने उसके खिलाफ अस्त्र नहीं उठाए. अर्जुन के बाणों से घायल होकर भीष्म धरती पर नहीं गिरे, बल्कि बाणों की शय्या पर टिके रहे. कथा के अनुसार, उनके पास उस समय भी मृत्यु को स्वीकार करने का अधिकार था, लेकिन उन्होंने तुरंत प्राण त्यागने से इनकार कर दिया.

कृष्ण ने क्यों नहीं बचाया?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कृष्ण ने भीष्म को बचाने की कोशिश इसलिए नहीं की क्योंकि भीष्म की मृत्यु किसी सामान्य युद्ध में हुई हत्या नहीं थी. उन्हें इच्छा-मृत्यु का वरदान प्राप्त था और उन्होंने स्वयं अपने प्राण छोड़ने का समय चुना. भीष्म ने उत्तरायण आने तक बाणों की शय्या पर रहने का निर्णय लिया. इस दौरान उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म, नीति और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण उपदेश भी दिए. महाभारत के शांति पर्व और अनुशासन पर्व में उनके उपदेशों का विस्तृत वर्णन मिलता है. जब सूर्य उत्तरायण हुआ, तब भीष्म ने भगवान कृष्ण और पांडवों की उपस्थिति में अपने प्राण त्याग दिए.

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