Chor Mandir Chhindwara : भारत में ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी मान्यताओं और रहस्यमयी इतिहास के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित ‘चोर मंदिर’. पहली बार इस मंदिर का नाम सुनने वाला व्यक्ति जरूर चौंक जाता है कि आखिर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर का नाम ‘चोर मंदिर’ क्यों पड़ा? क्या यहां कभी चोरी हुई थी या फिर इस नाम के पीछे कोई पौराणिक रहस्य छिपा है? दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर का नाम किसी अपराध से नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की एक अनोखी लीला और सदियों पुरानी लोकमान्यता से जुड़ा हुआ माना जाता है. यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. पढ़िए मंदिर से जुड़ी रोचक मान्यताएं-
कहां है चोर मंदिर?
भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित यह प्राचीन मंदिर मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित है. स्थानीय लोगों के बीच यह ‘चोर मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध है. हालांकि, यहां विराजमान भगवान श्रीकृष्ण की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और मंदिर की धार्मिक मान्यता दूर-दूर तक फैली हुई है.
क्यों पड़ा ‘चोर मंदिर’ नाम?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कई सौ वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण की यह प्रतिमा किसी अन्य स्थान से यहां लाई गई थी. कहा जाता है कि, प्रतिमा को गुप्त रूप से लाकर यहां स्थापित किया गया था, इसलिए धीरे-धीरे लोग इसे ‘चोर मंदिर’ कहने लगे. एक अन्य लोककथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण स्वयं ‘माखन चोर’ के रूप में प्रसिद्ध हैं, इसलिए भी समय के साथ इस मंदिर का नाम ‘चोर मंदिर’ पड़ गया. हालांकि, इन कथाओं का कोई स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था आज भी इन मान्यताओं से जुड़ी हुई है.
चोर मंदिर नाम के पीछे की एक और वजह
मंदिर के पुजारी की मानें तो, डेढ़ सौ साल पहले ये पूरा इलाका वीरान था. घने जंगल और पहाड़ियों के कारण चोरों को यहां छिपने की जगह मिल जाती थी. जिससे चोर, चोरी का सामान यहां लेकर आते थे और आपस में बंटवारा करते थे. इसलिए इस मंदिर का नाम चोर मंदिर पड़ गया. हालांकि, अब ऐसा नहीं है.
भगवान श्रीकृष्ण की होती है विशेष पूजा
मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. विशेष रूप से जन्माष्टमी, कृष्ण पक्ष के प्रमुख पर्वों और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं. श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान श्रीकृष्ण अवश्य सुनते हैं.
आस्था और इतिहास का अनोखा संगम
चोर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास, लोककथाओं और आस्था का अद्भुत संगम भी है. दिर का अनोखा नाम लोगों में जिज्ञासा पैदा करता है और यही जिज्ञासा उन्हें यहां तक खींच लाती है. आसपास के क्षेत्र के लोग इस मंदिर को अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं.
अधूरी रह गई थी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा
जानकारी के मुताबिक, जिस परिवार ने डेढ़ सौ साल पहले इस मंदिर का निर्माण करवाया था, उनके यहां कुछ परेशानी आने के बाद मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा नहीं हो पाई. इसलिए बिना प्राण प्रतिष्ठा के ही कृष्ण कन्हैया विराजमान रहे.