Karna Kunti Promise Story: महाभारत का युद्ध हुआ… कुरुक्षेत्र के रण में कौरवों और पांडवों के बीच महासंग्राम छिड़ा और अंत में पांडवों की विजय हुई. यह कथा कौन नहीं जानता है? लेकिन इस युद्ध से जुड़ी कुछ ऐसी बातें भी हैं, जिनके पीछे का रहस्य आज भी लोगों को हैरान करता है. इसी युद्ध में एक ऐसा योद्धा भी था, जो चाहता तो चार पांडवों का अंत कर सकता था. इसके बाद भी उसने उसने कुंती को दिया वचन निभाया. जी हां, उस योद्धा का नाम था कर्ण.
कुरुक्षेत्र का युद्ध शुरू होने से पहले कर्ण जानता था कि सामने खड़े पांडव उसके लिए केवल शत्रु नहीं, उसके अपने भाई भी हैं. हालांकि, पांडवों को यह सच मालूम नहीं था. युद्ध से ठीक पहले कुंती ने कर्ण को यह रहस्य बताया और उसे अपने साथ चलकर पांडवों का साथ देने के लिए कहा. लेकिन, कर्ण ने दुर्योधन का साथ छोड़ने से इनकार कर दिया. इसके बाद उसने कुंती को ऐसा वचन दिया, जिसने चार पांडवों की जान बचा दी. पढ़िए महाभारत की रोचक कथा-
कुंती ने कर्ण से क्यों मांगा वचन?
महाभारत के युद्ध से पहले कुंती कर्ण से मिलने पहुंचीं. उन्होंने बताया कि कर्ण उनका ही पुत्र है और सूर्यदेव के वरदान से उसका जन्म हुआ था. लोकलाज के भय से कुंती ने उसे नदी में प्रवाहित कर दिया था. बाद में अधिरथ और राधा ने उसका पालन-पोषण किया. यह सच जानकर कर्ण भावुक जरूर हुआ, लेकिन उसने दुर्योधन का साथ छोड़ने से साफ इनकार कर दिया. कर्ण ने कहा कि, जब पूरी दुनिया ने उसे ठुकराया था, तब दुर्योधन ने उसे सम्मान और पहचान दी थी. इसलिए वह युद्ध में दुर्योधन का साथ कभी नहीं छोड़ेगा.
कर्ण ने दिया कुंती को बड़ा वचन
पांडवों की ओर से लड़ने से मना तो कर दिया, लेकिन कर्ण ने अपनी मां कुंती को आश्वासन दिया कि वह उनके चार पुत्रों- युधिष्ठिर, भीम, नकुल और सहदेव को नहीं मारेगा. कर्ण ने कहा कि, उसका युद्ध केवल अर्जुन से होगा. वह अर्जुन को युद्ध में मारने का प्रयास करेगा, लेकिन बाकी चार पांडवों को जान से नहीं मारेगा. कर्ण जानता था कि चाहे वह मरे या अर्जुन, अंत में कुंती के पांच पुत्र जीवित रहेंगे. यदि कर्ण मारा जाता है तो पांडवों के पांचों भाई जीवित रहेंगे और यदि वह अर्जुन को मार देता है तो उसके स्थान पर कर्ण स्वयं पांडवों में पांचवां पुत्र रहेगा.
फिर कर्ण ने चारों को क्यों छोड़ा?
कर्ण के सामने दो रिश्ते थे- एक तरफ दुर्योधन के प्रति उसकी मित्रता और कृतज्ञता तो दूसरी तरफ अपनी जन्मदात्री मां कुंती का रिश्ता. उसने दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ा, लेकिन मां से किया वचन भी निभाया. युद्ध के दौरान कर्ण और पांडवों के बीच कई भीषण संघर्ष हुए, लेकिन कुंती से किए वचन के कारण उसने युधिष्ठिर, भीम, नकुल और सहदेव को अपना लक्ष्य बनाकर उनका वध नहीं किया. उसका सबसे बड़ा युद्ध अर्जुन से था.
कर्ण और अर्जुन का युद्ध बना निर्णायक
कुरुक्षेत्र में आखिरकार कर्ण और अर्जुन आमने-सामने आए. दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ. कर्ण के जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष इसी युद्ध में अपने चरम पर पहुंचा और अंततः अर्जुन के हाथों कर्ण की मृत्यु हुई. कर्ण की मृत्यु के बाद पांडवों को जब यह पता चला कि वह वास्तव में उनका ज्येष्ठ भाई था, तो उनके लिए यह सत्य बेहद पीड़ादायक था. खासकर युधिष्ठिर को इस बात का गहरा दुख हुआ कि जिस योद्धा से उन्होंने युद्ध किया, वह वास्तव में उनका अपना बड़ा भाई था.