Home > धर्म > Ekadashi kab hai: 8 अगस्त या 9 अगस्त? कामिका एकादशी पर व्रत रखने से पहले जान लें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

Ekadashi kab hai: 8 अगस्त या 9 अगस्त? कामिका एकादशी पर व्रत रखने से पहले जान लें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

Ekadashi kab hai: हिंदू कैलेंडर में सावन का पवित्र महीना आध्यात्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है. जहां सावन का हर दिन भगवान शिव के भक्तों के लिए खास महत्व रखता है, वहीं इस पवित्र महीने में आने वाली एकादशी भी बहुत अहम मानी जाती है.

By: Heena Khan | Published: August 8, 2026 9:39:34 AM IST



Ekadashi kab hai: हिंदू कैलेंडर में सावन का पवित्र महीना आध्यात्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है. जहां सावन का हर दिन भगवान शिव के भक्तों के लिए खास महत्व रखता है, वहीं इस पवित्र महीने में आने वाली एकादशी भी बहुत अहम मानी जाती है. ऐसे में अक्सर लोग इस उलझन में होते हैं कि एकादशी कब है और सही मुहूर्त क्या है? चलिए जान लेते हैं इन सवालों के जवाब.

कब है सावन 2026 में कामिका एकादशी?

सही तारीख, समय, पंचांग तिथि, पूजा और व्रत का शुभ मुहूर्त जानें. कामिका एकादशी श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है. भक्तों का मानना ​​है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखने से आध्यात्मिक शुद्धि होती है. 2026 में कामिका एकादशी का व्रत रविवार, 9 अगस्त को रखा जाएगा. एकादशी तिथि 8 अगस्त को शुरू होगी और 9 अगस्त तक रहेगी.

चूंकि व्रत आमतौर पर सूर्योदय के समय मौजूद तिथि के आधार पर तय किए जाते हैं, इसलिए व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा. पंचांग की गणना और स्थान के आधार पर एकादशी तिथि के शुरू और खत्म होने के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है. इसलिए, जो भक्त व्रत या पारण के कड़े नियमों का पालन करते हैं, उन्हें व्रत शुरू करने या खत्म करने से पहले अपने शहर का स्थानीय पंचांग देख लेना चाहिए.

ये भी पढ़ें: रामायण का वो खौफनाक संगीत! जब दर्द में डूबे रावण ने अपने ही शरीर को बनाया म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट, शिवजी से जुड़ी है कथा

कामिका एकादशी 2026 पूजा मुहूर्त

9 अगस्त 2026 को कई शुभ मुहूर्त हैं, जिन्हें भक्त अपनी धार्मिक गतिविधियों की योजना बनाते समय ध्यान में रख सकते हैं. दिए गए समय के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:21 बजे से 5:58 बजे तक रहेगा, जबकि प्रातः संध्या सुबह 5:39 बजे से 6:35 बजे तक होगी. 

ये भी पढ़ें: काशी के पिता कहलाते हैं महेश्वर महादेव! 40 फीट नीचे विराजते हैं भोलेनाथ, रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान

Advertisement