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पाकिस्तान में विराजती हैं मां हिंगलाज, 51 शक्तिपीठों में है विशेष स्थान, दर्शन मात्र से मिलती है आत्मिक शांति

Hinglaj Mata Temple: 51 शक्तिपीठों को देवी शक्ति के सबसे पवित्र धामों में गिना जाता है. इन्हीं में से एक है हिंगलाज माता शक्तिपीठ, जो आज पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है. सीमाओं के पार होने के बावजूद यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. आइए जानते हैं हिंगलाज माता मंदिर की पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व.

By: Lalit Kumar | Published: July 19, 2026 1:31:55 PM IST



Hinglaj Mata Temple: सनातन धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है. देश-विदेश में स्थित 51 शक्तिपीठों को देवी शक्ति के सबसे पवित्र धामों में गिना जाता है. इन्हीं में से एक है हिंगलाज माता शक्तिपीठ, जो आज पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है. सीमाओं के पार होने के बावजूद यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से दर्शन और पूजा करने वाले भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन की कठिनाइयों से लड़ने का साहस प्राप्त होता है. अब सवाल है कि आखिर, इस शक्तिपीठ का संबंध माता सती से कैसे जुड़ा? यहां माता सती का कौन-सा अंग गिरा था? क्यों इसे शक्ति साधना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है? आइए जानते हैं हिंगलाज माता मंदिर की पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व.

माता सती से जुड़ी है शक्तिपीठ की कथा

पुराणों के अनुसार, जब राजा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तब माता सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए. शोकाकुल भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे. तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अनेक भाग कर दिए. जहां-जहां उनके अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई. 

हिंगलाज शक्तिपीठ में कौन सा अंग गिरा

मान्यता है कि, सीमा पार हिंगलाज शक्तिपीठ में माता सती का ब्रह्मरंध्र (सिर का ऊपरी भाग) या मस्तक का हिस्सा गिरा था. इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है. हालांकि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में गिरे हुए अंग के बारे में कुछ मतभेद भी मिलते हैं.

गुफा के भीतर विराजती हैं हिंगलाज माता

हिंगलाज माता का मंदिर बलूचिस्तान के हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में एक प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित है. यहां देवी की प्रतिमा के बजाय प्राकृतिक शिला स्वरूप की पूजा की जाती है. श्रद्धालु इसे आदिशक्ति का स्वयंभू रूप मानते हैं. मंदिर तक पहुंचने का मार्ग पहाड़ों और रेगिस्तानी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे यह यात्रा अपने आप में एक आध्यात्मिक अनुभव मानी जाती है.

दर्शन मात्र से मिलती है आत्मिक शांति

धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा से हिंगलाज माता के दर्शन करते हैं, उन्हें मानसिक शांति, आत्मिक बल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. कई भक्त इसे शक्ति साधना, मनोकामना पूर्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने वाला तीर्थ मानते हैं. हर वर्ष यहां विशेष मेले और धार्मिक आयोजन भी होते हैं, जिनमें भारत सहित विभिन्न देशों से श्रद्धालु भाग लेने का प्रयास करते हैं.

भारत में भी है हिंगलाज माता के प्रति गहरी आस्था

यद्यपि मूल शक्तिपीठ पाकिस्तान में स्थित है, लेकिन भारत के कई राज्यों में हिंगलाज माता को समर्पित मंदिर स्थापित हैं. विशेष रूप से राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में देवी के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां श्रद्धालु हिंगलाज माता की पूजा-अर्चना करते हैं.

शक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम

हिंगलाज माता शक्तिपीठ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है. सीमाओं के पार स्थित होने के बावजूद इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी अटूट है. यही कारण है कि 51 शक्तिपीठों में इसका विशेष स्थान माना जाता है और देवी भक्त जीवन में एक बार यहां दर्शन करने की इच्छा अवश्य रखते हैं.

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