Guruwar Puja Mantra: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देव गुरु बृहस्पति की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने से जीवन के कई कष्ट दूर हो सकते हैं. खासकर जिन लोगों की कुंडली में गुरु दोष होता है या शादी, करियर और धन से जुड़ी परेशानियां चल रही होती हैं, उन्हें गुरुवार के दिन पूजा जरूर करनी चाहिए.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है. इसलिए पूजा में पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, गुड़ और केसर जैसी चीजों का इस्तेमाल शुभ माना जाता है.
गुरुवार को कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और देव गुरु बृहस्पति के मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है. माना जाता है कि इन मंत्रों के जाप से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं.
भगवान विष्णु का मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
यह भगवान विष्णु का बेहद शक्तिशाली मंत्र माना जाता है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करता है, उसके जीवन के दुख और संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं. घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है.
विष्णु गायत्री मंत्र:
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्
अगर आप गुरुवार को इस मंत्र का जाप करते हैं, तो मानसिक तनाव कम हो सकता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. धार्मिक मान्यता है कि इससे दुख और परेशानियां दूर होती हैं.
गुरु बीज मंत्र:
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
बृहस्पति मंत्र:
ॐ बृं बृहस्पतये नमः
इन मंत्रों का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, गुरु मजबूत होने पर करियर, शिक्षा, विवाह और धन से जुड़ी परेशानियां कम होने लगती हैं.
बृहस्पति मंत्र जपने के फायदे
- कुंडली में गुरु दोष कम होता है
- विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो सकती हैं
- वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ती है
- नौकरी और करियर में तरक्की के योग बनते हैं
- बिजनेस में लाभ मिलने की संभावना बढ़ती है
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
- बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता में वृद्धि होती है
गुरुवार पूजा का सही समय क्या है?
गुरुवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान के बाद पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है. इसके अलावा सुबह 6 बजे से 9 बजे तक का समय भी पूजा-पाठ के लिए अच्छा माना जाता है.अगर सुबह पूजा न कर पाएं, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में भी भगवान विष्णु और देव गुरु बृहस्पति की पूजा कर सकते हैं.