Home > धर्म > न मां के गर्भ से जन्म, न सामान्य प्रसव से! क्या पहले ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ थे द्रोणाचार्य, ऋषि भारद्वाज से जुड़ी है कथा

न मां के गर्भ से जन्म, न सामान्य प्रसव से! क्या पहले ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ थे द्रोणाचार्य, ऋषि भारद्वाज से जुड़ी है कथा

Dronacharya Birth Story: महाभारत में ऐसे कई रहस्य हैं, जिनकी कथाएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं. ऐसी ही एक कहानी गुरु द्रोणाचार्य के जन्म से भी जुड़ी है. कहा जाता है कि, उनका जन्म किसी मां के गर्भ से नहीं, बल्कि एक पात्र से हुआ था! आखिर ऋषि भारद्वाज के आश्रम में ऐसा क्या हुआ कि एक पात्र से बालक द्रोण का जन्म हुआ?

By: Lalit Kumar | Published: October 3, 2026 8:52:55 AM IST



Dronacharya Birth Story: महाभारत में ऐसे कई रहस्य हैं, जिनकी कथाएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं. ऐसी ही एक कहानी गुरु द्रोणाचार्य के जन्म से भी जुड़ी है. कौरवों और पांडवों को युद्धकला सिखाने वाले द्रोणाचार्य के बारे में कहा जाता है कि, उनका जन्म किसी मां के गर्भ से नहीं, बल्कि एक पात्र से हुआ था! आखिर ऋषि भारद्वाज के आश्रम में ऐसा क्या हुआ कि एक पात्र से बालक द्रोण का जन्म हुआ? क्या इसी वजह से उन्हें आज के दौर में ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ से जोड़कर देखा जाता है? आइए जानते हैं महाभारत के आदिपर्व में वर्णित इस रोचक कथा के बारे में.

गंगा किनारे ऋषि भारद्वाज के साथ क्या हुआ?

महाभारत के आदिपर्व में गुरु द्रोणाचार्य के जन्म की कथा का वर्णन मिलता है. इसके अनुसार, ऋषि भारद्वाज गंगा नदी के तट पर तपस्या और धार्मिक कार्यों में लीन रहते थे. एक दिन वे स्नान के लिए गंगा तट पर पहुंचे. वहां उन्होंने घृताची नाम की एक अप्सरा को देखा, जो स्नान के बाद नदी से बाहर आ रही थीं.

कथा के अनुसार, अप्सरा को देखकर ऋषि भारद्वाज के मन में कामभाव उत्पन्न हुआ. उनके शरीर से निकले वीर्य को उन्होंने एक पात्र में सुरक्षित रख लिया. इसी पात्र से एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम द्रोण रखा गया. इसी बालक का नाम महाभारत के वर्णन में ‘द्रोण’ कहा गया है.

पात्र से जन्म के कारण पड़ा द्रोणाचार्य नाम

कथा में द्रोणाचार्य का जन्म सामान्य गर्भधारण और प्रसव से नहीं बताया गया है. महाभारत के अनुसार, वे ऋषि भारद्वाज के पुत्र थे और पात्र से जन्म लेने के कारण उनका नाम द्रोण पड़ा. बाद में यही बालक वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता बना और अस्त्र-शस्त्र विद्या में भी निपुण हुआ. आगे चलकर द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांडवों को युद्धकला की शिक्षा दी. अर्जुन को उनके प्रमुख शिष्यों में गिना जाता है. 

क्या सच में पहले ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ थे द्रोणाचार्य?

द्रोणाचार्य के जन्म की इस कथा को कई लोककथाओं में आधुनिक ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है. क्योंकि, महाभारत में उनका जन्म सामान्य गर्भ से बाहर, एक पात्र से हुआ था. हालांकि, टेस्ट ट्यूब का जिक्र कल्पना मात्र है. क्योंकि, आधुनिक टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक में अंडाणु और शुक्राणु का निषेचन नियंत्रित प्रयोगशाला प्रक्रिया के जरिए किया जाता है, जिसके बाद भ्रूण को गर्भाशय में स्थापित किया जाता है. 

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