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देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक क्यों खास माने जाते हैं ये चार महीने? जानिए देवशयनी एकादशी की तिथि, नियम और धार्मिक महत्व

Chaturmas 2026 Date: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होती है. आइए जानते हैं इसके महत्व व शुरुवात की तारीख के बारे में.

By: Shivashakti Narayan Singh | Published: July 9, 2026 3:34:03 PM IST



Chaturmas 2026 Date: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होती है. अगले चार महीनों तक श्रद्धालु पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत और सात्विक जीवनशैली का पालन करते हैं. इस दौरान कई मांगलिक कार्य भी नहीं किए जाते. आइए जानते हैं कि साल 2026 में चातुर्मास कब शुरू होगा, कब समाप्त होगा और इस दौरान किन नियमों का पालन करना शुभ माना गया है.

Chaturmas 2026: कब से कब तक रहेगा चातुर्मास?

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी. इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ माना जाएगा. यह अवधि कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक रहती है. मान्यता है कि इन चार महीनों के बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और फिर से सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं.

क्या है चातुर्मास का धार्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं. इस अवधि में भगवान शिव की उपासना का भी विशेष महत्व बताया गया है. माना जाता है कि इन चार महीनों में किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है. इसलिए साधक इस समय आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना पर विशेष ध्यान देते हैं.

चातुर्मास में किन नियमों का पालन करना चाहिए?

चातुर्मास के दौरान सात्विक और संयमित जीवन जीने की परंपरा है. श्रद्धालु तामसिक भोजन से दूरी बनाकर पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक कार्यों में अधिक समय बिताते हैं. कई लोग इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और भूमि पर सोने का संकल्प भी लेते हैं. साथ ही नियमित रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करना शुभ माना जाता है.

इन चीजों का त्याग करने की है परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में हर महीने कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का त्याग करने की परंपरा है.
  • श्रावण में हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खाई जातीं.
  • भाद्रपद में दही और छाछ का सेवन छोड़ने की परंपरा है.
  • आश्विन में दूध का त्याग किया जाता है, हालांकि भगवान के चरणामृत का सेवन किया जा सकता है.
  • कार्तिक में काली उड़द और उससे बने व्यंजनों से परहेज किया जाता है.

चातुर्मास में कौन-से काम नहीं करने चाहिए?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, चातुर्मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए व्यापार की शुरुआत और अन्य मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए. इसके अलावा पेड़-पौधे काटने, अनावश्यक रूप से भूमि खोदने और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाने वाले कार्य भी शुभ नहीं माने जाते.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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