Bhanumati Arjuna Marriage: पांडव और कौरव भाई थे, लेकिन दुर्योधन ने सत्ता के लालच में कभी उन्हें अपना परिवार नहीं माना. दोनों की दुश्मनी ने महाभारत जैसे महायुद्ध को जन्म दिया जिसमें लाखों लोग मारे गए. मतलब, महाभारत की कथा में कौरवों और पांडवों के बीच दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है. एक तरफ दुर्योधन और दूसरी तरफ अर्जुन दोनों ऐसे योद्धा थे, जो कुरुक्षेत्र में आमने-सामने खड़े थे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, एक लोककथा में दुर्योधन की पत्नी भानुमती का विवाह बाद में अर्जुन से होने की बात का जिक्र है? सुनने में यह कहानी जितनी हैरान करने वाली लगती है, इसके पीछे उतनी ही रोचक वजह भी बताई जाती है. हालांकि, भानुमती और अर्जुन के विवाह का प्रसंग महाभारत के मूल संस्कृत पाठ में नहीं मिलता है. यह बाद की लोकपरंपराओं और कथाओं में लोकप्रिय हुआ है. अब सवाल है कि आखिर, भानुमती कौन थीं? दुर्योधन की मृत्यु के बाद क्या हुआ? पढ़िए महाभारत की रोचक कथा-
कौन थीं भानुमती?
लोककथाओं में भानुमती को कंबोज के राजा चंद्रवर्मा की पुत्री बताया जाता है. उन्हें बेहद सुंदर, बुद्धिमान और साहसी स्त्री के रूप में जाता है. कथा के अनुसार, उनके विवाह के लिए स्वयंवर आयोजित किया गया था. कहा जाता है कि, भानुमती की इच्छा अर्जुन से विवाह करने की थी, लेकिन अर्जुन स्वयंवर में नहीं पहुंच सके थे. कुछ लोककथाओं के अनुसार, दुर्योधन कर्ण की सहायता से भानुमती को अपने साथ ले गया और बाद में दोनों का विवाह हुआ. इस तरह भानुमती हस्तिनापुर की महारानी बनीं.
दुर्योधन की मृत्यु के बाद क्या हुआ?
लोकप्रिय कथा का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यहीं से शुरू होता है. कुरुक्षेत्र युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु के बाद कौरव परिवार लगभग बिखर चुका था. कथा के अनुसार, भानुमती को अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की चिंता सताने लगी. एक मान्यता के अनुसार, इसी दौरान भानुमती ने अर्जुन से विवाह का प्रस्ताव रखा. इसके पीछे प्रेम से ज्यादा परिवारों के बीच पुरानी दुश्मनी खत्म करने और अपने बच्चों को सुरक्षा देने की भावना बताई जाती है. हालांकि, कुछ आधुनिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि श्रीकृष्ण ने भानुमती को ऐसा करने की सलाह दी थी.
क्या अर्जुन ने सच में भानुमती से विवाह किया था?
मूल महाभारत के उपलब्ध संस्कृत पाठ में भानुमती का नाम तक स्पष्ट रूप से नहीं मिलता, जबकि बाद की रचनाओं में उन्हें दुर्योधन की पत्नी के रूप में लोकप्रियता मिली. भानुमती के अर्जुन से विवाह की कथा भी बाद की लोककथाओं और क्षेत्रीय परंपराओं का हिस्सा मानी जाती है.
‘भानुमती ने कुनबा जोड़ा’ कहावत से कनेक्शन
भानुमती के नाम से जुड़ी एक चर्चित कहावत है- ‘कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा.’ इस व्याख्या में अलग-अलग लोगों या रिश्तों को जोड़ने के अर्थ में इस्तेमाल किया जाता है. अर्जुन-भानुमती विवाह की लोककथा को भी इसी विचार से जोड़कर देखा जाता है कि भानुमती ने कौरव और पांडव परिवारों के बीच रिश्ते की एक नई कड़ी जोड़ दी थी.