Home > धर्म > Bhadrapada Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर… भाद्रपद अमावस्या कब है? सुबह 08:56 बजे तक ही मुहूर्त, फिर पितरों के तर्पण-श्राद्ध कब करें

Bhadrapada Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर… भाद्रपद अमावस्या कब है? सुबह 08:56 बजे तक ही मुहूर्त, फिर पितरों के तर्पण-श्राद्ध कब करें

Bhadrapada Amavasya 2026 Date: भाद्रपद महीने की अमावस्या को लेकर इस बार लोगों के मन में एक सवाल है- जब अमावस्या तिथि 11 सितंबर की सुबह सिर्फ 8 बजकर 56 मिनट तक ही रहेगी, तो पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण कब किया जाएगा? आइए जानते हैं इस बारे में-

By: Lalit Kumar | Published: September 2, 2026 5:36:25 PM IST



Bhadrapada Amavasya 2026 Date: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब बात पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध की हो तो अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है. भाद्रपद महीने की अमावस्या को लेकर इस बार लोगों के मन में एक सवाल है- जब अमावस्या तिथि 11 सितंबर की सुबह सिर्फ 8 बजकर 56 मिनट तक ही रहेगी, तो पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण कब किया जाएगा? आइए जानते हैं भाद्रपद अमावस्या 2026 की सही तारीख, मुहूर्त और पितृ कर्म का समय-

कब शुरू और कब खत्म होगी अमावस्या तिथि?

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026, गुरुवार को सुबह 10:33 बजे शुरू होगी. वहीं, अमावस्या तिथि का समापन 11 सितंबर 2026 को सुबह 8:56 बजे होगा. तिथि के सूर्योदय से जुड़े नियमों के कारण इस बार अमावस्या को लेकर तारीख को समझना जरूरी है. पंचांग परंपरा के अनुसार, दर्श अमावस्या 10 सितंबर को मानी जाएगी, जबकि 11 सितंबर को अमावस्या तिथि के समापन के कारण स्नान और दान आदि किए जाएंगे.

11 सितंबर को स्नान-दान का मुहूर्त

11 सितंबर को अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे तक रहेगी. इस दिन सुबह स्नान और दान करना शुभ माना जाता है. दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से 5:18 बजे तक रहेगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक बताया गया है. हालांकि, अभिजीत मुहूर्त सामान्य शुभ कार्यों के लिए माना जाता है, जबकि पितृ कर्म के लिए मुख्य रूप से कुतुप और रौहिण आदि अपराह्न काल की परंपराएं भी देखी जाती हैं.

पितरों के लिए कब करें तर्पण और श्राद्ध?

ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री के अनुसार, इस बार अमावस्या तिथि 11 सितंबर की सुबह समाप्त हो रही है, इसलिए पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मों को लेकर 10 सितंबर की दर्श अमावस्या महत्वपूर्ण मानी जा रही है. पंचांग विवरण के अनुसार, 10 सितंबर को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे के बीच पितरों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है. इसी अवधि में अभिजीत मुहूर्त भी पड़ता है. इस दिन सिद्ध और साध्य योग का भी निर्माण हो रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन योगों में किया गया श्राद्ध और तर्पण पितरों को तृप्त करने वाला माना जाता है.

क्या अमावस्या पर धरती पर आते हैं पितर?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण, तर्पण और श्राद्ध करने से उन्हें शांति और संतुष्टि मिलती है. मान्यता है कि पितर अपनी संतानों से तर्पण और श्राद्ध की अपेक्षा रखते हैं और प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं.

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