84 Ghanta Devi Mandir: मंदिरों में आपने घंटियां तो खूब देखी होंगी, लेकिन क्या कभी ऐसा मंदिर देखा है जहां चारों तरफ सिर्फ घंटे ही घंटे नजर आते हों? उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित 84 घंटा देवी मंदिर इसी अनोखी वजह से श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है. यहां मान्यता है कि, माता रानी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होने पर भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार घंटा चढ़ाते हैं. यही वजह है कि मंदिर परिसर में आज बड़ी संख्या में घंटे दिखाई देते हैं. दावा है कि, यहां 11 लाख से अधिक घंटे लगे हुए हैं. अब सवाल है कि आखिर, इस मंदिर का नाम 84 घंटा देवी मंदिर कैसे पड़ा और इसके पीछे क्या कहानी है? आइए जानते हैं इस खास रिपोर्ट में.
हर तरफ नजर आते हैं घंटे ही घंटे
बरेली के सुभाषनगर थाना क्षेत्र में बदायूं रोड पर स्थित 84 घंटा मंदिर स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर परिसर में जहां नजर जाती है, वहां अलग-अलग आकार के घंटे दिखाई देते हैं. मान्यता के अनुसार जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी होती है तो वह माता रानी के दरबार में घंटा चढ़ाता है. यही घंटे धीरे-धीरे मंदिर की पहचान बनते गए.
घंटियों की आवाज से गूंज उठता वातावरण
कहा जाता है कि आज मंदिर में 11 लाख से अधिक घंटे लगे हुए हैं. मंदिर में आरती के समय जब एक साथ घंटियां बजती हैं तो पूरा वातावरण घंटों की आवाज और माता रानी के जयकारों से गूंज उठता है. श्रद्धालु इसे बेहद आध्यात्मिक और मन को शांति देने वाला अनुभव बताते हैं.
कैसे पड़ा 84 घंटा मंदिर नाम?
मंदिर के इतिहास से जुड़ी जानकारी पर संस्थापक रविंद्र मोहन गर्ग कहते हैं कि, वर्ष 1969 में उनकी माता को माता रानी के दर्शन हुए थे. मान्यता के मुताबिक माता ने मंदिर निर्माण का संकेत दिया और कहा कि यहां पहले मंदिर बनाया जाए. इसी दौरान मंदिर से जुड़ी एक खास भविष्यवाणी भी सामने आई कि पहले दिन बड़ी संख्या में घंटे चढ़ाए जाएंगे. संस्थापक के अनुसार, 12 बजे तक 84 घंटे चढ़ चुके थे. इसके बाद यह स्थान धीरे-धीरे ‘84 घंटा मंदिर वाली माता’ के नाम से प्रसिद्ध होने लगा.
संतान और विवाह की मन्नतें लेकर पहुंचते हैं भक्त
मंदिर से जुड़ी सबसे प्रचलित मान्यताओं में संतान प्राप्ति और विवाह से जुड़ी मनोकामनाएं भी शामिल हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि संतान की इच्छा रखने वाले दंपती यहां माता रानी से प्रार्थना करते हैं और मन्नत पूरी होने पर घंटा चढ़ाते हैं.
इसी तरह विवाह, नौकरी और परिवार से जुड़ी इच्छाओं को लेकर भी लोग माता के दरबार में पहुंचते हैं. हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, इनके चमत्कारिक प्रभाव का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.
वर्ष 1969 से मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती गई और मन्नत पूरी होने पर घंटा चढ़ाने की परंपरा भी मजबूत होती गई. आज यही परंपरा 84 घंटा देवी मंदिर की सबसे अलग पहचान बन चुकी है.