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बाबा इकोत्तर नाथ मंदिर… जहां दिन में तीन बार बदलता है शिवलिंग का रंग, मन्नत पूरी होने पर प्रसाद नहीं बल्कि हैंडपंप चढ़ाने की है अनोखी परंपरा

Baba Ikottar Nath Temple: भारत में भगवान शिव के ऐसे अनेकों-अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और चमत्कार आज भी लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं. इन्हीं में से एक है उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पूरनपुर के पास गोमती नदी के तट पर स्थित बाबा इकोत्तर नाथ महादेव मंदिर.

By: Lalit Kumar | Published: July 23, 2026 3:24:13 PM IST



Baba Ikottar Nath Temple: भारत में भगवान शिव के ऐसे अनेकों-अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और चमत्कार आज भी लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं. इन्हीं में से एक है उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पूरनपुर के पास गोमती नदी के तट पर स्थित बाबा इकोत्तर नाथ महादेव मंदिर. यह मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि, यहां स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है. इतना ही नहीं, यहां मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मिठाई या नारियल नहीं, बल्कि हैंडपंप चढ़ाते हैं. यही अनोखी परंपरा इस मंदिर को देश के अन्य शिवालयों से अलग पहचान दिलाती है. आइए जानते हैं इस प्राचीन मंदिर की रोचक कथा और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में.

दिन में तीन बार बदलता है शिवलिंग का रंग

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बाबा इकोत्तर नाथ मंदिर में विराजमान शिवलिंग सुबह, दोपहर और शाम अलग-अलग रंगों में दिखाई देता है. सुबह यह हल्के या धूसर रंग का प्रतीत होता है, दोपहर में इसका रंग गहरा हो जाता है, जबकि शाम के समय यह अलग आभा लिए नजर आता है. श्रद्धालु इसे भगवान शिव का दिव्य चमत्कार मानते हैं.

कैसे पड़ा मंदिर का इकोत्तर नाथ नाम?

लोकमान्यता के अनुसार, इस स्थान पर भगवान शिव के अनेक स्वरूपों की पूजा होती रही है. कहा जाता है कि यहां शिव के 71 (इकोत्तर) स्वरूपों का विशेष महत्व माना जाता है, जिसके कारण इस मंदिर का नाम इकोत्तर नाथ महादेव पड़ा. वर्षों से यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.

मन्नत पूरी होने पर चढ़ाया जाता है हैंडपंप

इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा है हैंडपंप चढ़ाने की. मान्यता है कि जिसकी मनोकामना बाबा इकोत्तर नाथ पूरी कर देते हैं, वह श्रद्धालु मंदिर परिसर में एक नया हैंडपंप लगवाता है. इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और आसपास के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होता है. आज मंदिर परिसर में लगे अनेक हैंडपंप इस परंपरा की गवाही देते हैं.

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भीड़

सावन के पूरे महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए पहुंचते हैं. भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से बाबा का पूजन करने पर विवाह, संतान, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

आस्था और सेवा का अनूठा संगम

बाबा इकोत्तर नाथ मंदिर की विशेषता केवल इसकी चमत्कारी मान्यताएं ही नहीं हैं, बल्कि यहां की परंपरा समाज सेवा का भी संदेश देती है. प्रसाद के स्थान पर हैंडपंप लगाने की परंपरा जरूरतमंदों को पानी उपलब्ध कराने का माध्यम बन गई है. यही कारण है कि यह मंदिर आस्था के साथ-साथ जनकल्याण का भी प्रतीक माना जाता है.

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