Home > धर्म > Amavasya kab ki hai: आखिर कब है आषाढ़ अमावस्या? इस दिन करें ये खास उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद और दूर होंगी बाधाएं

Amavasya kab ki hai: आखिर कब है आषाढ़ अमावस्या? इस दिन करें ये खास उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद और दूर होंगी बाधाएं

Amavasya kab ki hai: हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 2026 मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी. अमावस्या तिथि 13 जुलाई को शाम 6:49 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई को दोपहर 3:12 बजे समाप्त होगी.

By: Heena Khan | Published: July 14, 2026 7:04:23 AM IST



Ashadh Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या, आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पड़ती है. यह दिन पूर्वजों को याद करने, पूजा-पाठ करने और दान-पुण्य के कामों में शामिल होने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. आषाढ़ अमावस्या के मुख्य रीति-रिवाजों में से एक है पितृ तर्पण, जिसमें पूर्वजों के सम्मान में पानी और अक्सर काले तिल चढ़ाए जाते हैं. भक्त परिवार के दिवंगत सदस्यों की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए यह रस्म निभाते हैं. चलिए जान लेते हैं कि इस बार अमावस्या की रात कब है? 

कब है अमावस्या? (Amavasya kab ki hai) 

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 2026 मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी. अमावस्या तिथि 13 जुलाई को शाम 6:49 बजे शुरू होगी और 14 जुलाई को दोपहर 3:12 बजे समाप्त होगी. चूंकि 14 जुलाई को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद है, इसलिए इसे उसी दिन मनाया जाएगा. परिवार आषाढ़ अमावस्या पर अपने पूर्वजों को याद करते हैं, पूजा करते हैं और क्षेत्रीय परंपराओं का पालन करते हैं. कई लोग भोग के लिए भोजन भी तैयार करते हैं और अपनी आध्यात्मिक साधना के हिस्से के रूप में भोजन बांटते हैं.

आज के दिन दान कितना लाभदायक ?

कई भक्त दिन की शुरुआत पवित्र स्नान, प्रार्थना और ध्यान से करते हैं. पवित्र नदियों में स्नान करना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है, जबकि अन्य लोग घर पर ही श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं. कई भक्त दिन की शुरुआत पवित्र स्नान, प्रार्थना और ध्यान से करते हैं. पवित्र नदियों में स्नान करना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है, जबकि अन्य लोग घर पर ही श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं. दान, अमावस्या से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्य है. भक्त अक्सर दया और सेवा भाव से जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और जरूरी चीजें दान करते हैं.

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आज करें ये शुभ कार्य 

भक्त अपना दिन प्रार्थना करने, मंदिरों में जाने और आध्यात्मिक गतिविधियों में शामिल होकर बिता सकते हैं. स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में ये प्रथाएं अलग-अलग हो सकती हैं. पूरे भारत में आषाढ़ अमावस्या को मनाने का तरीका अलग-अलग है. जहां कुछ समुदाय पितृ अनुष्ठानों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं अन्य अपनी परंपराओं के अनुसार मंदिरों में जाने, दान करने और आध्यात्मिक कार्यों पर जोर देते हैं.अमावस्या के दौरान किए जाने वाले कार्य अक्सर दया, कृतज्ञता और प्रकृति के साथ सामंजस्य को बढ़ावा देते हैं. कई भक्त धार्मिक कार्यों को दान-पुण्य और सभी प्रकार के जीवन के प्रति सम्मान के साथ जोड़ते हैं.

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