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अमरनाथ का शिवलिंग क्यों बदलता है अपना आकार? जानें बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा का रहस्य और धार्मिक महत्व

Amarnath Yatra 2026: भगवान शिव के सबसे पवित्र धामों में शामिल अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है  हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों में स्थित अमरनाथ गुफा पहुंचते हैं.आइए जानते हैं अमरनाथ यात्रा का इतिहास, गुफा का धार्मिक महत्व और बाबा बर्फानी से जुड़ी रोचक मान्यताएं .

By: Shivashakti Narayan Singh | Last Updated: July 3, 2026 7:04:24 PM IST



Amarnath Yatra 2026: भगवान शिव के सबसे पवित्र धामों में शामिल अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है  हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों में स्थित अमरनाथ गुफा पहुंचते हैं .इस गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है.  धार्मिक मान्यता है कि यह शिवलिंग चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ अपना आकार भी बदलता है . आइए जानते हैं अमरनाथ यात्रा का इतिहास, गुफा का धार्मिक महत्व और बाबा बर्फानी से जुड़ी रोचक मान्यताएं .
 
 
3 जुलाई से अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ हो गया है, जो 28 अगस्त तक चलेगी  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पहले जत्थे को जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से रवाना किया  श्रद्धालु दो प्रमुख मार्गों से यात्रा कर सकते हैं  पहला पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग, जिसकी लंबाई लगभग 48 किलोमीटर है, जबकि दूसरा बालटाल मार्ग*करीब 14 किलोमीटर लंबा है, जिसे अपेक्षाकृत छोटा और कठिन माना जाता है .

कब शुरू हुई अमरनाथ यात्रा?

 अमरनाथ यात्रा की शुरुआत को लेकर कोई स्पष्ट ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है  हालांकि, नीलमत पुराण, राजतरंगिणी और आइने-अकबरी जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस पवित्र धाम का उल्लेख मिलता है.  इतिहासकारों का मानना है कि यह यात्रा कई सदियों से आस्था का केंद्र रही है और समय के साथ इसका स्वरूप संगठित होता गया .

कहां स्थित है अमरनाथ गुफा?

 अमरनाथ गुफा जम्मू-कश्मीर की लिद्दर घाटी में समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.  यह गुफा पहलगाम से लगभग 46 किलोमीटर और बालटाल से करीब 14 किलोमीटर दूर है  पारंपरिक मान्यता के अनुसार यात्रा श्रीनगर से शुरू मानी जाती थी, लेकिन वर्तमान में अधिकांश श्रद्धालु चंदनवाड़ी से पैदल यात्रा आरंभ करते हैं .

क्यों खास है बाबा बर्फानी का शिवलिंग?

 अमरनाथ गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग है  धार्मिक मान्यता के अनुसार यह शिवलिंग चंद्रमा के शुक्ल और कृष्ण पक्ष के अनुसार अपने आकार में परिवर्तन करता है . पूर्णिमा के आसपास इसका आकार बड़ा हो जाता है, जबकि अमावस्या की ओर यह धीरे-धीरे छोटा होता दिखाई देता है  यही कारण है कि इसे बाबा बर्फानी के दिव्य चमत्कार के रूप में देखा जाता है .

बूटा मलिक से जुड़ी प्रसिद्ध लोककथा

 अमरनाथ गुफा की पुनः खोज को लेकर एक लोकप्रिय लोककथा प्रचलित है  कहा जाता है कि ‘बूटा मलिक’ नाम के एक स्थानीय चरवाहे को एक संत ने कोयले से भरी पोटली दी थी जब उसने घर पहुंचकर उसे खोला तो कोयला सोने के सिक्कों में बदल चुका था,  संत का धन्यवाद करने के लिए जब वह वापस लौटा तो वहां संत नहीं मिले, बल्कि एक गुफा दिखाई दी, जिसके भीतर प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग विराजमान था . इसके बाद उसने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी और तभी से यह गुफा प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गई .
   Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. Inkhabar इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
 
 

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