Mrityu Panchak: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 06 जून से 11 जून तक का समय मृत्यु पंचक होगा. कहा जा रहा है कि ये समय काफी कष्टकारी होता है. शनिवार से मृत्यु पंचक की शुरुआत हो रही है. मान्यता है कि इस दौरान जो भी काम किया जाता है, उसका प्रभाव कई गुना तक बढ़ जाता है. इसके कारण इस दौरान अशुभ परिणामों और दुर्घटनाओं के डर से नए और मांगलिक कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है.
क्यों अशुभ है पंचक?
बता दें कि पंचक के समय पर शुभ काम करने की मनाही होती है. हालांकि जब पंचक की शुरुआत शनिवार से होती है, तो उसे मृत्यु पंचक कहा जाता है. ज्योतिष में शनि देव को कर्मफल और न्याय का देवता माना गया है. इस संयोग को दुर्घटनाओं, विवादों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण माना जाता है. मृत्यु पंचक के दौरान चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है. इनकी ऊर्जा को अस्थिर और नकारात्मक माना जाता है. इसके कारण अच्छे कामों में रुकावट आती है.
किन कामों से बचना चाहिए?
- वैदिक ज्योतिष के अनुसार, मृत्यु पंचक के दौरान लकड़ी का सामान खरीदना, घर में लकड़ी इकट्ठी करना और खाट, बेड और पलंग आदि बनवाना वर्जित होता है.
- इस दौरान घर का लेंटर नहीं डालना चाहिए, भूमि पूजन नहीं करना चाहिए और निर्माण कार्य शुरू नहीं करना चाहिए.
- दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि दक्षिण दिशा को यम की दिशा कहा जाता है. कहा जाता है ऐसा करने से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है.
- मृत्यु पंचक के दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ काम नहीं किए जाते हैं.
- इसके अलावा आपको नई मशीनरी का उपयोग शुरू करना या कोई नया वाहन नहीं खरीदना चाहिए.
बता दें कि अगर मृत्यु पंचक या पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके लिए गरुड़ पुराण या शास्त्रोक्त विधि के तहत विशेष शांति के लिए कर्म किए जाते हैं. मृत्यु पंचक के दौरान कोई भी नया काम करने, नए कपड़े खरीदने, नया सामान खरीदने या कोई भी अच्छा काम करना वर्जित माना जाता है.