Home > धर्म > 1 साल में 3 ईद मनाएंगे मुसलमान! दुनियाभर में बनेगा अनोखा रिकॉर्ड; जानें किस साल होगा ये अजूबा

1 साल में 3 ईद मनाएंगे मुसलमान! दुनियाभर में बनेगा अनोखा रिकॉर्ड; जानें किस साल होगा ये अजूबा

3 Eid in 1 Year: मुसलमानों के लिए एक बेहद ही हैरान कर देने वाली खबर है. बता दें कि एक साल ऐसा आने वाला है जब मुसलमान 3 ईद और दो हज एक ही साल में मनाएंगे.

By: Heena Khan | Published: October 3, 2026 10:07:13 AM IST



3 Eid in 1 Year: मुसलमानों के लिए एक बेहद ही हैरान कर देने वाली खबर है. बता दें कि एक साल ऐसा आने वाला है जब मुसलमान 3 ईद और दो हज एक ही साल में मनाएंगे. जी हाँ!  अब आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे मुमकिन है, UAE और पूरी मुस्लिम दुनिया में रहने वाले लोग 2039 में एक अनोखा एस्ट्रोनॉमिकल अलाइनमेंट देखने वाले हैं, जिसमें एक ही ग्रेगोरियन कैलेंडर साल में तीन ईद के त्योहार पड़ेंगे. सऊदी अरब के जाने-माने क्लाइमेट और एस्ट्रोनॉमिकल एक्सपर्ट डॉ. अब्दुल्ला अल मिसनाद के मुताबिक, यह अनोखा अलाइनमेंट इस वजह से है कि इस्लामिक लूनर कैलेंडर धीरे-धीरे सोलर ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुकाबले बदल रहा है, जो हर साल लगभग 11 दिन आगे बढ़ रहा है.

डबल हज और अराफात का दिन

यह बदलाव 2039 में एक खास मेल की ओर ले जाएगा. साल की शुरुआत 6 जनवरी, 2039 को पहली ईद अल अज़हा से होगी, जो 10 ज़ुल हिज्जा 1460 के बराबर है, जो हज का पारंपरिक अंत और कुर्बानी का बड़ा त्योहार है. लेकिन यह अकेला नहीं होगा. लगभग 12 महीने बाद, लूनर कैलेंडर फिर से अपना पूरा साइकिल पूरा करेगा, और दूसरा हज सीज़न शुरू होगा, जो 26 दिसंबर को एक और ईद अल अज़हा के साथ खत्म होगा, जो साल 1461 में ज़ुल हिज्जा की 10 तारीख के हिसाब से है. इसका मतलब है कि एक ही सोलर साल में मक्का की दो अलग-अलग तीर्थयात्राएँ की जाएँगी, जो बहुत ही कम होता है.

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एक ही साल में दो कुर्बानी 

दोनों मौकों पर अराफ़ात का अपना दिन होगा, जो ईद से पहले का रूहानी दिन होता है, जब तीर्थयात्री माउंट अराफ़ात पर नमाज़ पढ़ने के लिए इकट्ठा होते हैं. इन दोनों मौकों के बीच ईद अल फ़ितर होगी, जिसके 19 अक्टूबर, 2039 को पड़ने की उम्मीद है. एक ही साल में तीन ईद, दो कुर्बानी की और एक जश्न की, रोज़े, तीर्थयात्रा, नमाज़ और त्योहार का एक बेमिसाल रूहानी साइकिल बनाती हैं. लूनर कैलेंडर का बदलाव सिर्फ़ हज सीज़न तक ही सीमित नहीं है. रोज़े और आध्यात्मिक सोच-विचार का सबसे पवित्र महीना रमज़ान भी जल्द ही ऐसा ही अनुभव करेगा.

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