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170 साल पुराना रामलला मंदिर… सीमेंट नहीं, पिसी दाल और चूने से हुआ निर्माण! बाल स्वरूप में विराजे हैं श्रीराम

Ram Lalla Temple Kanpur: भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं, चमत्कार और अनसुलझे रहस्य लोगों को हैरान कर देते हैं. अयोध्या में भव्य राम मंदिर की चर्चा के बीच कानपुर का एक ऐसा प्राचीन रामलला मंदिर भी है, जिसकी कहानी बेहद अनोखी बताई जाती है. रावतपुर गांव में स्थित इस मंदिर को करीब 170 साल पुराना बताया जाता है. पढ़िए रोचक कथा-

By: Lalit Kumar | Published: July 31, 2026 3:33:57 PM IST



Ram Lalla Temple Kanpur: भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं, चमत्कार और अनसुलझे रहस्य लोगों को हैरान कर देते हैं. कहीं मंदिरों की वास्तुकला वैज्ञानिकों को चुनौती देती है, तो कहीं वहां होने वाली घटनाएं तर्क से परे नजर आती हैं. इनमें कुछ मंदिर वास्‍तव में ऐसे हैं, जिनके बारे में सुनने के बाद इन्‍हें करीब से देखने और जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है. अयोध्या में भव्य राम मंदिर की चर्चा के बीच कानपुर का एक ऐसा प्राचीन रामलला मंदिर भी है, जिसकी कहानी बेहद अनोखी बताई जाती है. रावतपुर गांव में स्थित इस मंदिर को करीब 170 साल पुराना बताया जाता है. यहां भगवान राम के बाल स्वरूप की महज 6 इंच की प्रतिमा विराजमान है. स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर के निर्माण में सीमेंट की जगह पिसी हुई दाल और चूने का इस्तेमाल किया गया था. यही नहीं, मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहां विराजमान रामलला का यह बाल स्वरूप दुनिया में अनोखा है.

170 साल पुराना है रामलला मंदिर

कानपुर के रावतपुर गांव में स्थित इस मंदिर को स्थानीय स्तर पर काफी प्राचीन माना जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मंदिर करीब 170 वर्ष पुराना है. यहां रामलला की बाल स्वरूप प्रतिमा स्थापित है, जिसकी ऊंचाई करीब छह इंच बताई गई है. मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी प्राचीनता नहीं है, बल्कि यहां विराजमान रामलला के स्वरूप को लेकर भी भक्तों में खास आस्था है. स्थानीय पुजारी के हवाले से रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ऐसी बाल स्वरूप प्रतिमा कहीं और नहीं है. हालांकि, ‘विश्व में ऐसी प्रतिमा कहीं नहीं’ वाला दावा स्थानीय मान्यता है.

दाल और चूने से निर्माण की क्या है कहानी?

इस मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात इसके निर्माण की तकनीक को लेकर कही जाती है. स्थानीय परंपरा में दावा किया जाता है कि पुराने समय में मंदिर के निर्माण के दौरान सीमेंट की जगह चूने और पिसी हुई दाल जैसे पारंपरिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में आज की तरह आधुनिक सीमेंट आसानी से उपलब्ध नहीं था. हालांकि, पिसी दाल के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी के लिए उपलब्ध स्वतंत्र ऐतिहासिक या पुरातात्विक दस्तावेज सीमित हैं. 

छह इंच के रामलला हैं आकर्षण का केंद्र

मंदिर में विराजमान रामलला की छोटी प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां भगवान राम का बाल स्वरूप स्थापित है. अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भी कानपुर के इस मंदिर की चर्चा सामने आई थी. सितंबर 2024 में मंदिर में रामलला के नवीन विग्रह की स्थापना भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किए जाने की खबर सामने आई थी.

आस्था और इतिहास का अनोखा संगम

कानपुर का यह रामलला मंदिर भक्तों के लिए केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास और धार्मिक परंपरा से जुड़ी आस्था का केंद्र भी है. करीब डेढ़ सदी से अधिक पुराना बताया जाने वाला यह मंदिर आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. दाल-चूने से निर्माण और विश्व में अनोखी रामलला प्रतिमा जैसे दावे स्थानीय मान्यताओं का हिस्सा हैं, जबकि मंदिर की प्राचीनता और छह इंच की बाल स्वरूप प्रतिमा के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स उपलब्ध हैं.

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