वाराणसी. उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले पूर्व बीएसएफ जवान तेजबहादुर यादव ने इनखबर से खास बातचीत करते हुए पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा है. तेज बहादुर यादव ने पहले निर्दलीय प्रत्याशी और बाद में सपा के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पर्चा दाखिल किया था. हालांकि, चुनाव से पहले ही उनकी उम्मीदवारी खारिज हो गई. पीएम मोदी पर हमलावर हुए तेज बहादुर यादव ने भाजपा की ओर से उन्हें  पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव न लड़ने के लिए घूस का ऑफर मिलने का दावा भी किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की वजह को लेकर तेज बहादुर यादव ने कहा कि पुलवामा हमले के बाद उन्होंने यह कदम उठाया. तेज बहादुर यादव ने बिना नाम लिए बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए देश के 49 जवानों को बलि चढ़ा दिया. तेज बहादुर ने आगे कहा कि पुलवामा हमले का उन्हें गहरा दुख हुआ, जिसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वे पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.

तेज बहादुर यादव बोले- पुलवामा हमले की हो जांच

तेज बहादुर यादव ने बताया कि पहले भी उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की जांच होनी चाहिए. तेज बहादुर ने इंटरव्यू में कहा था कि जब तक चुनाव पूरा नहीं होगा, ये जवान ऐसे ही मरते रहेंगे.

सेना के खाने की कमियां उजागर करती तेज बहादुर की वायरल वीडियो को बनाने पर उन्हें बीएसएफ से निकाल दिया गया. जिसे लेकर तेज बहादुर यादव ने कहा कि इस मामले में उन्हें इंसाफ नहीं मिला है. तेज बहादुर ने बताया कि उस दौरान कोई भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था. इसके लिए उन्होंने जंतर मंतर पर धरणा भी दिया, जब किसी भी तरफ से उन्हें मदद नहीं मिली तो आखिरकार उन्हें राजनीति में आना पड़ा.

पूर्व बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे जवानों पर राजनीति कर रहे हैं. तेज बहादुर ने कहा कि ये तो उन्होंने पहले ही मन बना लिया था कि अगर चुनाव लड़ेंगे तो सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ेंगे.

तेज प्रताप ने बताया कैसे मिले उन्हें सपा से टिकट

वहीं समाजवादी पार्टी से टिकट मिलने को लेकर उन्होंने कहा कि जब उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया तो हर किसी पार्टी को एक पत्र लिखा जिसमें अपने संघर्ष के बारे में बताया. तेज बहादुर ने बताया कि सबसे पहले अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने उनके पत्र का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी उनके साथ है. जिसके बाद उनकी मुलाकात अखिलेश यादव से मिले. उस समय अखिलेश यादव ने तेज बहादुर को आश्वासन देते हुए कहा था कि सही समय पर सही फैसला लिया जाएगा.

पहले समाजवादी पार्टी ने शालिनी यादव को अपना उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद तेज बहादुर यादव को टिकट दे दिया गया. लेकिन तेज बहादुर के नामांकन खारिज होने के बाद अब फिर से शालिनी यादव ही वाराणसी से सपा-बसपा और आरएलडी महागठबंधन से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी.

क्यों खारिज हुआ था तेज बहादुर यादव का नामांकन

दरअसल तेज बहादुर यादव ने जब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया तो बीएसएफ से बर्खास्त होने की बात बताई जिसे सपा की ओर से नामांकन करते समय छुपा दी. निर्वाचन अधिकारी ने गड़बड़ी लगने पर तेज बहादुर यादव को अगले दिन सुबह 11 बजे तक बीएसएफ से एनओसी लाने के लिए कहा. तेज बहादुर यादव एनओसी नहीं जमा कर सके जिसके बाद उनके नामांकन को रद्द कर दिया गया.

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