Friday, December 9, 2022
गुजरात नतीजे (182/182)  हिमाचल नतीजे (68/68) 
BJP - 156 BJP - 25
AAP - 05 CONG - 40 
CONG - 17  AAP - 00
OTH - 04  OTH - 03 
Is gold is going to extinct from world

क्या ख़त्म होने वाला है सारी दुनिया का सोना?

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क्या ख़त्म होने वाला है सारी दुनिया का सोना? सोने का इस्तेमाल आम इंसानों से लेकर दुनिया भर की सरकारें करती हैं। सोने के बग़ैर...

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UP Crime: उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले से रिश्तों को तार-तार करने वाला वाकया निकलकर सामने आ रहा है. जहाँ पर एक पति ने...

दिल्ली: कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, MCD चुनाव जीतने वाले पार्षद AAP में शामिल

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MG 4 EV

नए साल पर पेश होने वाली है ये इलेक्ट्रिक कार, मिलेगी 452km की रेंज!

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MG 4 EV: देश की कार कंपनी एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) अगले साल के आगाज़ में एकदम नई इलेक्ट्रिक कार पेश करेगी।...

Gujarat Muslim Seats: जानिए क्या है गुजरात की मुस्लिम बहुल्य सीटों का हाल?

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Gujarat Muslim Candidates: गुजरात विधानसभा के नतीजों के बाद साफ़ है कि भारतीय जनता पार्टी ने भारी बढ़त के साथ जीत हासिल की है....

संजय राउत के घर से 11.50 लाख रुपये भी ED ने जब्त किए

 

मुंबई, संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय ने आज हिरासत में ले लिया है और अब उनपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. ताजा जानकारी के मुताबिक, संजय राउत के घर से ईडी ने 11.50 लाख रुपये भी जब्त किए हैं, बता दें ईडी दफ्तर पहुंचने के बाद संजय राउत ने मीडिया से भी बात की. यहां उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को कमजोर करने की साज़िश की जा रही है, लेकिन वह झुकेंगे नहीं. इस बीच संजय राउत के वकील ने दावा किया है कि उन्हें सिर्फ पूछताछ के लिए बुलाया गया है, उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है.

80 के दशक में रिपोर्टर थे राउत

संजय राउत का जन्म 15 अक्टूबर 1961 को हुआ था, वह सोमवंशी क्षत्रिय पठारे समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. मुंबई के कॉलेज से बी.कॉम. करने के बाद वह पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए थे. वह एक मराठी अखबार में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम करते थे. उनके अंडरवर्ल्ड में अच्छे सूत्र थे और क्राइम रिपोर्टर के तौर पर अच्छी पहचान भी थी. पत्रकारिता के दौरान ही वह राज ठाकरे के संपर्क में आए और उनकी अच्छी दोस्ती हो गई, उस समय राज ठाकरे शिवसेना में बड़े नेता हुआ करते थे.

बालासाहेब ने दी थी राउत को नौकरी

संजय राउत क्राइम रिपोर्टर के तौर पर अच्छा काम कर रहे थे, इसी बीच शिवसेना के मराठी मुखपत्र सामना में वैकेंसी निकलीं, और ये वैकेंसी भी थी, कार्यकारी संपादक की. बालासाहेब ने इस पद के लिए संजय राउत को चुना. इसके बाद संजय राउत सामना का कार्यभार देखने लगे, वह इसमें काफी तीखे संपादकीय लिखा करते थे. बालासाहेब को उनकी लेखनी बहुत पसंद आई, फिर क्या था इसके बाद सामना का हिंदी एडिशन भी शुरू किया गया. संजय राउत की इसमें बड़ी भूमिका थी, जल्दी ही बालासाहेब के विचार और संजय राउत की लेखनी का तालमेल इतना अच्छा हो गया कि वह जो कुछ लिख देते थे उसे बालासाहेब का ही विचार मान लिया जाता था.

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