नई दिल्लीः राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला के देवघर कोषागार मामले में दोषी करार दिए गए हैं. सीबीआई अदालत ने लालू यादव को दोषी करार दिया. लालू यादव की सजा का ऐलान 3 जनवरी को होगा. चारा घोटाला भारत के बिहार प्रान्त का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला था जिसमें पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 37.70 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये थे.साल 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से पशु चारे के नाम पर अवैध तरीके से 89 लाख 27 हजार रुपये निकालने का आरोप है.इस सरकारी खजाने की इस चोरी में बिहार के तत्कालीन मुख्यमन्त्री लालू प्रसाद यादव व पूर्व मुख्यमन्त्री जगन्नाथ मिश्र के अलावा अन्य कई लोगों पर आरोप लगा. चारा घोटाले के कारण लालू यादव को मुख्यमन्त्री के पद से त्याग पत्र देना पड़ा था. लेकिन राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी लालू प्रसाद यादव ने अपनी जगह अपनी बीबी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी थी. लालू पर पशुओं के चारे के नाम पर चाईबासा ट्रेजरी से 37.70 करोड़ रुपए निकालने का आरोप था.

जानिए क्या रहा चारा घोटाले का पूरा घटनाक्रम:-

27 जनवरी 1996 : पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे के रुप में रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट सामने आई थी. इस घोटाले में चाईबासा ट्रेजरी से इसके लिए गलत तरीके से 37.70 करोड़ रुपए निकाले गए थे.

11 मार्च, 1996 : पटना उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए थे.

19 मार्च, 1996 : उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बैंच को निगरानी करने को कहा.

27 जुलाई, 1997 : सीबीआई ने मामले में राजद सुप्रीमो पर पकड़ मजबूत करी.

30 जुलाई 1997 : लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत के सामने समर्पण किया था.

19 अगस्त 1998 : लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के आय से अधिक की संपत्ति का मामला दर्ज कराया गया.

4 अप्रैल 2000 : लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज किया था. राबड़ी देवी को बनाया गया सह-आरोपी.

5 अप्रैल 2000 : लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने समर्पण किया था, राबड़ी देवी को मामले में जमानत मिल गई थी.

9 जून, 2000 : अदालत में लालू प्रसाद के खिलाफ आरोप तय किए.

अक्टूबर 2001 : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नए राज्य में ट्रांसफर कर दिया था. झारखंड में मामला                                     ट्रांसफर होने के बाद लालू ने आत्मसमर्पण किया था.

18 दिसंबर 2006 ः में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को आय से अधिक संपत्ति मामले में क्लीन चिट मिल गई थी.

2000 से 2012ः   तक मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई थी, इस दौरान मामले के कई गवाहों की भी मौत हो गई थी.

17 मई 2012 :   सीबीआई की विशेष अदालत में राज सुप्रीमों लालू यादव पर इस मामले में कुछ नए आरोप तय किए गए थे.

17 सितंबर 2013 : चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था.

30 सितंबर, 2013 : बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों- लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्र तथा 45 अन्य को सीबीआई न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह ने दोषी ठहराया.

3 अक्तूबर 2013: लालू प्रसाद को विशेष सीबीआई अदालत ने पांच वर्ष के कठोर कारावास और 25 लाख रुपये के जुर्माने तथा पूर्व                मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को चार वर्ष की कैद और दो लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनायी.

दिसंबर 2013 ः दो महीने तक जेल में रहने के बाद 13 दिसम्बर को लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिली

23 दिसंबर 2017 ः को हुई चारा घाटाला के देवघर कोषागार मामले में मामले में लालू यादव दोषी करार दिए गए सजा का ऐलान 3 जनवरी 2017 को होगा.

Live Update: चारा घोटाला मामले में लालू यादव दोषी करार, 3 जनवरी को होगा सजा का एलान

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