नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार को राष्ट्र को संबोधित करेंगे. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और राज्य का पुनर्गठन करने वाले बिल पर संसद के दोनों सदनों में गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाला. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र के नाम संबोधन कर जनता को इस बिल के बारे में जानकारी देंगे. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 राज्यसभा के बाद मंगलवार को लोकसभा से भी पारित हो गया. अब इस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के औपचारिक हस्ताक्षर बाकी है. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद पीएम मोदी देश को संबोधित करेंगे.

सोमवार और मंगलवार दोनों दिन गृह मंत्री अमित शाह ने ही केंद्र सरकार की ओर से पूरा मोर्चा संभाला और विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद इसे दोनों सदनों में यह पारित करवाया. पीएम नरेंद्र मोदी भी मंगलवार को लोकसभा में इस बिल पर चर्चा के दौरान उपस्थित रहे. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में भाषण नहीं दिया.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जब अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में आर्टिकल 370 हटाने के लिए प्रस्ताव लेकर आए तब उनके हाथ में गोपनीय कागज थे. उस कागज पर संवैधानिक, राजनैतिक और कानून व्यवस्था ये तीन टाइटल लिखे थे. राजनैतिक सेक्शन में 7 अगस्त को राष्ट्र के नाम संबोधन का जिक्र था. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी 7 अगस्त को राष्ट्र को संबोधित कर सकते हैं.

 

बीजेपी सरकार लोकसभा में धारा 370 हटाने का संकल्प और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 पारित करवाने में सफल रही. कांग्रेस जहां इस बिल का विरोध कर इसे मोदी सरकार का एकतरफा फैसला बता रही थी तो वहीं दूसरी तरफ पार्टी में फूट भी दिखी. कांग्रेस के कई बड़े युवा नेता इस बिल के समर्थन में दिखे, इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, दीपेंद्र हुड्डा और जनार्दन द्विवेदी के नाम शामिल हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात ट्वीट कर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और राज्यसभा के पदेन सभापति वैंकेया नायडू का धारा 370 पर दोनों सदनों में कार्यवाही संभालने का धन्यवाद किया. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को गर्व होगा कि सांसदों ने वैचारिक मतभेदों को भुलाकर उनके भविष्य को लेकर चर्चा की. साथ ही साथ वहां शांति, प्रगति और समृद्धि की राह सुनिश्चित की.

पीएम मोदी ने लिखा कि संसद में जिस प्रकार विभिन्न पार्टियों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर और वैचारिक मतभेदों को भुलाकर सार्थक चर्चा की, उसने हमारे संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाने का काम किया है. प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों और राजनीतिक दलों को इसकी बधाई दी.

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