नई दिल्ली. महाराष्ट्र एनसीपी के विधायक दल के नेता अजित पवार बीजेपी के साथ मिल गए और महाराष्ट्र में सरकार बन गई. देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री और अजित पवार उप-मुख्यमंत्री बने. हालांकि अजित के बीजेपी में शामिल होने से एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी नाराज हैं लेकिन ये कहना गलत नहीं कि अजीत ने चाचा को चित कर दिया है. क्योंकि अजित ने शरद से ही राजनीति सीखी है क्योंकि शरद पवार ने भी महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ ऐसा किया था जो आज उनके भतीजे अजित पवार ने किया है.

साल 1977 में कुछ ऐसा हुआ था जो राजनीति में कभी नहीं हुआ था क्योंकि इस साल हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को जनता पार्टी के हाथों हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव के बाद कांग्रेस के दो हिस्से हो गए और जुलाई 1978 में शरद पवार ने पार्टी छोड़ दी. इसके बाद जनता पार्टी ने उन्हें समर्थन दे दिया और वह पहली बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने. जनता पार्टी और के साथ शरद पवार की पार्टी कांग्रेस (एस) के गठबंधन को लोगों ने प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन कहा था. हालांकि इसके बाद केंद्र में 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार बनी और उन्होंने शरद पवार की पार्टी को बर्खास्त कर दिया.

राजनीति में यही तो किसी के समझ नहीं आता कि कब क्या हो जाए. जहां शिवसेना बीजेपी से अलग होकर उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थी अब उसके अरमानों पर अजित पवार ने पानी फेर दिया है. वहीं इसी बीच कांग्रेस की समझ ये नहीं आ रहा है कि उनकी पार्टी ने इस गठबंधन में आकर सही किया है या गलत. अहमद पटेल ने कहा था कि अजि पवार ने रात के अंधेरे में पाप किया है.

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