नई दिल्ली: पिछले कई दिनों से देश में कृषि कानूनों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शु्क्रवार को किसानों से संवाद कर रहे हैं. अपने भाषण में पीएम मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि एमएसपी खत्म नहीं किया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बटन दबाकर 9 करोड़ से अधिक किसान लाभार्थियों के खातों में 18,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित की. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसानों के जीवन मे खुशी, हम सभी के जीवन में खुशी बढ़ा देती है। आज का दिवस तो बहुत ही पावन भी है। किसानों को आज जो सम्मान निधि मिली है, उसके साथ ही आज का दिन कई अवसरों का संगम बनकर भी आया है.

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आज देश के 9 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधे, एक क्लिक पर 18 हज़ार करोड़ रुपए जमा हुए हैं। जब से ये योजना शुरू हुई है, तब से 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा किसानों के खाते में पहुंच चुके हैं. मुझे आज इस बात का अफसोस है कि पश्चिम बंगाल के 70 लाख से अधिक किसान भाई-बहनों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। बंगाल के 23 लाख से अधिक किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं। लेकिन राज्य सरकार ने वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को इतने लंबे समय से रोक रखा है. पीएम ने आगे कहा कि स्वार्थ की राजनीति करने वालों को जनता बहुत बारीकी से देख रही है। जो दल पश्चिम बंगाल में किसानों के अहित पर कुछ नहीं बोलते वो दल यहां किसान के नाम पर दिल्ली के नागरिकों को परेशान करने में लगे हुए हैं, देश की अर्थनीति को बर्बाद करने में लगे हुए हैं. 

 गौरतलब है कि पिछले एक महीने से राजधानी दिल्ली की सड़कों पर चल रहा किसान अंदोलन अब तूल पकड़ता जा रहा है. अब तक इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और किसानों के बीच कोई सुलहा नहीं हो पाई है. इस बीच एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का समर्थन करने सड़को पर उतरे हैं. 

बता दें कि किसानों के समर्थक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को गुरुवार को दो करोड़ किसानों के हस्ताक्षर वाला पत्र सौेपा साथ ही कृषि कानूनों को वापस लेने की अपील भी की. इस मुलाकात में राहुल गांधी के साथ विपक्ष के कई नेता भी मौजूद रहे.  देखना यह होगा की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दो करोड़ किसानों के हस्ताक्षर वाले पत्र पर क्या फैसला लेते हैं.

फिलहाल, सरकार की ओर से कृषि कानूनों में संशोधनों का प्रस्ताव भी किसानों ने ठुकरा दिया है, और सरकार को कहा है कि हमें लिखकर नया प्रस्ताव दें, जिसपर सरकार विचार कर रही है. लेकिन, अब भी कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग में दिल्ली से सटे हरियाणा के सिंघु और टीकरी बॉर्डर और यूपी के नोएडा और गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन जारी है.

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