बेंगलुरू. कर्नाटक का सियासी नाटक खत्म होता नजर नहीं आ रहा. मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी की सरकार से  को आनन-फानन में कल अमेरिका से लौटना पड़ा. इस बीच कांग्रेस के सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद जल्द ही जेडीएस के सभी मंत्रियों की भी इस्तीफे की खबर आई. आज स्पीकर के रमेश कुमार ने  विधायकों, मंत्रियों के इस्तीफे पर कहा कि मुझे कोई इस्तीफा नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि ग्रुप में इस्तीफे स्वीकार नहीं होंगे. वहीं बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने कहा है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है और वह सिर्फ मनी पावर की मदद से अपनी सरकार बचाने की कोशिश में है.

बता दें कि 14 विधायकों के इस्तीफे के बाद कर्नाटक विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा भी बदल गया है. 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में 14 विधायकों के इस्तीफे के बाद बहुमत के लिए आंकड़ा 105 बैठता है. अभी के समीकरण के हिसाब से बीजेपी के पास कुल 105 विधायक हैं, एक अन्य विधायक का भी समर्थन प्राप्त है. ऐसे में बीजेपी की संख्या 106 हो जाती है जो बहुमत से एक ज्यादा है. एक अन्य विधायक ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया है. ऐसे में बीजेपी की संख्या 107 तक पहुंच गई है. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की बात करें तो स्पीकर को मिलाकर उनके पास 104 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. ऐसे में कर्नाटक में हुए इस सियासी उठापटक में बीजेपी को बहुमत का आंकड़ा मिलता नजर आ रहा है. लेकिन अभी कर्नाटक का खेल जारी है.
कर्नाटक में घट  रहे घटनाक्रम के पल-पल की अपडेट यहां पढ़ें-

कर्नाटक के स्पीकर के आर रमेश कुमार ने कहा- मैंने राज्यपाल को लिखा है कि मुझसे मिलने कोई विधायक नहीं आया है. उन्होंने मुझे आश्वस्त किया है कि संविधान के हिसाब से ही फैसला होगा. जिन 13 विधायकों ने इस्तीफा दिया है उनमें से 8 के इस्तीफे कानूनन सही नहीं हैं. मैंने उन्हें वक्त दिया है कि वो मेरे पास आकर अपनी बात रखें.

JDS विधायकों से मिलने पहुंचे कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी

राज्यसभा कल तक के लिए स्थगित

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की बागी विधायकों को चेतावनी- रद्द होगी सदस्यता
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक के सियासी संकट पर आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने सभी बागी विधायकों से अपना इस्तीफा वापस लेने की मांग की. सिद्धारमैया ने कहा, पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पीकर को कहा है कि बागी विधायकों को अयोग्य ठहराया जाए. यह पार्टी विरोधी गतिविधि है. ऐसा वह बीजेपी के इशारे पर कर रहे हैं. सिद्धारमैया ने सभी बागी विधायकों को चेतावनी दी है कि उनके उपर एंटी डिफेक्शन लॉ, संविधान के आर्टिकल 164 (1B) के तहत कार्रवाई होगी जिसमें डिफेक्शन करने वाले विधायकों की सदस्यता रद्द हो जाती है. बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 10 बागी कांग्रेसी विधायकों के अलावा पार्टी के सभी विधायकों से मुलाकात भी की.

कर्नाटक के सियासी संकट के विरोध में कांग्रेस सासंदों ने लोकसभा से किया वॉकआउट

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कर्नाटक के सियासी संकट पर कहा- जो कर्नाटक में हो रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है, इस तरह की गतिविधियों पर लोकतंत्र में हमेशा के लिए रोक लगनी चाहिए.

कर्नाटक के सियासी संकट पर राज्यसभा में हंगामा, कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित

बीजेपी नेता शोभा करंदलाजे का बयान, हमारे पास 107 विधायक, सरकार के पक्ष में सिर्फ 103,  राज्यपाल हमें सरकार बनाने का मौका दें

क्या हुआ था विधानसभा चुनावों में: कर्नाटक में कुल 224 विधानसभा सीटें हैं. बहुमत पाने के लिए 113 विधायकों का समर्थन जरूरी है. 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. बीजेपी को 104 सीटें मिली थीं वहीं कांग्रेस को 80 और जेडीएस को 37 सीटें मिलीं थीं. किसी भी दल के पास बहुमत नहीं था. बीएस येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाए. कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन कर लिया. येदुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा. कर्नाटक में तीसरे नंबर पर रही जेडीएस के नेता एचडी कुमारास्वामी ने नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.

कर्नाटक में अब क्या हो सकता है
पहली संभावना: एचडी कुमारास्वामी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कांग्रेस को मजबूरी में करना पड़ा था. इसके पीछे सिर्फ एक वजह थी बीजेपी को सत्ता से बाहर रखना. हालांकि अंदरखाने कांग्रेसी विधायक इस बात से खुश नहीं थे कि राज्य में तीसरे नंबर पर रहने वाली पार्टी अचानक से नंबर 1 हो गई. कांग्रेसी मंत्रियों ने इस्तीफा सौंप दिया है. ऐसे में एक संभावना बनती है कि कुमारास्वामी की जगह अगर कांग्रेस का कोई चेहरा नया मुख्यमंत्री बनता है तो पार्टी के विधायकों को मनाया जा सकता है. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए चल रहा है. खड़गे, बेंगलुरू पहुंच भी चुके हैं. कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी चाहते हैं. ऐसे में अगर वर्तमान गठबंधन को सत्ता में कायम रहना है तो शायद रास्ता यहीं हो. लेकिन क्या कुमारास्वामी इतनी आसानी से अपना पद छोड़ने को तैयार हो जाएंगे यह सबसे बड़ा सवाल है. अगर कुमारास्वामी पद छोड़ने से इनकार कर देते हैं जिसकी ज्यादा संभावना है तो फिर इस कर्नाटक के इस सियासी संकट का हल कुछ और होगा.

दूसरी संभावना: कर्नाटक में बेशक बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन जनता ने उसे बहुमत से दूर रखा. बीएस येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली थी लेकिन बहुमत साबित करने में नाकाम रहने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. ऐसे में वह टीस बीजेपी के अंदर अभी भी है कि सबसे बड़ी पार्टी रहते हुए भी वह सत्ता से बाहर है. कुमारास्वामी सरकार शुरुआत से ही किसी न किसी विवाद में उलझी है. सरकार बनने के 13 महीने बाद येदुरप्पा के पास दोबारा मुख्यमंत्री बनने का मौका है. कांग्रेस के 14 विधायकों के इस्तीफे के बाद सदन में बीजेपी के पास बहुमत का आंकड़ा आ गया है.

कर्नाटक विधानसभा की वर्तमान स्थिति
-224 कुल सीटें हैं
-113 सीट बहुमत के लिए
14 विधायकों के इस्तीफे के बाद स्थिति क्या
-210 रह जाएगी विधायकों की संख्या, स्पीकर सहित
– 107 विधायक भाजपा के हैं, एक अन्य का भी समर्थन
– 104 विधायक अभी सरकार के साथ, स्पीकर सहित
– 105 विधायकों का समर्थन चाहिए सरकार बनाने के लिए
इस आंकड़े के हिसाब से कर्नाटक में बीएस येदुरप्पा के नेतृत्व में नई सरकार बन सकती है. हालांकि ये आंकड़ें घटनाक्रम के साथ-साथ बदल रहे हैं. बीजेपी के पास एक निर्दलीय विधायक नागेश का समर्थन है. 10 कांग्रेस विधायकों के मुंबई के एक होटल में रुके होने की बात भी सामने आ रही है. इसके बाद आज सुबह खबर आई कि सभी विधायक गोवा जा सकते हैं, इसके बाद उनके पुणे जाने की खबर भी आई. छुपे हुए विधायकों की आंखमिचौली जारी है. अंतत: यह सदन में ही पता चल पाएगा कि आंकड़ों के खेल में कौन बाजी मार रहा है. 

तीसरी संभावना: कर्नाटक में अगर वर्तमान सरकार गिरती है और बीजेपी के सरकार बनाने के दावे को राज्यपाल मंजूरी नहीं देते हैं तो राज्य में राष्ट्रपति शासन का ही विकल्प बचेगा. ऐसे में मुख्यमंत्री की जगह राज्यपाल के हाथों में कमान आ जाएगी. कर्नाटक को जल्द ही दोबारा विधानसभा चुनावों से गुजरना होगा. ऐसे में कर्नाटक की सियासत में दोषारोपण और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलेगा. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नहीं चाहेगी कि पार्टी की छवि ऐसी बने कि वह किसी भी कीमत पर सत्ता चाहती है. चाहे इसके लिए बनी-बनाई सरकार को अस्थिर क्यों न करना पड़े. नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं चाहेंगे कि बीजेपी की सत्तालोलुप छवि बने. ऐसे में वह स्थानीय पार्टी नेतृत्व को बहुमत के लिए तिकड़म करने से मना कर सकते हैं. ऐसे में दोबारा चुनाव ही कर्नाटक के सियासी संकट का समाधान हो सकता है.

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