नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने के फैसले के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट में दायर 8 याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह जम्मू कश्मीर में अस्पतालों और स्कूलों की हालत जल्द सामान्य करे. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द जम्मू कश्मीर में हालात सामान्य करे. सुप्रीम कोर्ट में दायर अलग अलग याचिकाओं की सुनवाई के दौरान क्या हुआ उसकी पूरी सुनवाई की डिटेल पढ़ें यहां.

वाइको की याचिका पर सुनवाई
 राज्यसभा सांसद वाइको ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला से उनका संपर्क नही हो पा रहा है. जम्मू कश्मीर में हालात को लेकर कोर्ट को बताया. सुप्रीम कोर्ट ने वाइको की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. केंद्र सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा वो फारुख अब्दुल्ला के रिश्तेदार नहीं हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव करने से इंकार किया. कोर्ट ने सोमवार तक केंद्र सरकार से जवाब मांगा. वाइको ने सुप्रीम कोर्ट में हैबियस कोर्पस याचिका दाखिल की है.

सीता राम येचुरी की याचिका पर सुनवाई
सीता राम येचुरी की तरफ से कहा कि पूर्व विधायक मोहम्मद यूसुफ CPI(M) इस समय जम्मू कश्मीर गेस्ट हाउस में हैं. येचुरी ने कहा कि उन्हें डिटेंशन से मुक्त किया जाए. वो जहां जाना चाहते है उन्हें जाने दिया जाए. CJI ने पूछा अभी स्वास्थ्य कैसा है? येचुरी ने कहा कि उन्हें एक महीने बाद दिखाने को कहा है वो चाहे एम्स ही या किसी दूसरे अस्पताल में. येचुरी ने मोहम्मद यूसुफ की मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखी. कोर्ट ने कहा कि अगर आप डिस्चार्ज हो गए है तो आप जम्मू कश्मीर गेस्ट हाउस में क्यों है? कोर्ट ने पूछा आप कश्मीर क्यों नही जा रहे? कोर्ट ने कहा कि अगर आप स्वस्थ्य हैं तो आप कश्मीर जा सकते है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मोहम्मद यूसुफ को वापस श्रीनगर जाने की इजाजत दी.

अनुराधा भसीन की याचिका पर सुनवाई
भसीन की ओर से कहा गया कि ना तो इंटरनेट है ना ही संचार माध्यम शुरू हुए हैं. आज 43 वां दिन है. इस पर AG (अटॉर्नी जनरल) ने कहा कि पेपर जम्मू से छप रहा है, श्रीनगर में भी पेपर छप रहे हैं. कई पेपर पब्लिश हो रहे हैं, यहीं पेपर पब्लिश नही कर रहे हैं. कोर्ट ने पूछा कि पेपर ही नही ये मोबाइल, इंटरनेट सेवाओं की बात उठा रहे है? कोर्ट ने पूछा आखिर ऐसा क्यों है संचार व्यवस्था चालू नहीं है? AG ने कहा कि मीडिया पर्सन संचार व्यस्था का इस्तेमाल कर रहे है. AG ने कहा कि उन्हें दूरदराज के इलाकों में भी जाने की इजाजत है.कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि आप जो बातें कह रहे है उसे हलफनामा में लिखा कर दें. कोर्ट ने पूछा कि आपको कितना समय चाहिए. AG दो हफ्तों का समय चाहिए. AG पहले प्री प्लान अटैक होते रहे हैं कभी क्रॉस बॉडर के जरिये
तो कभी पत्थरबाजों के जरिए. AG ने कश्मीर में अभी तक के हमलों और कितने लोगों की अब तक जान गई इसको बारे में बताया. कोर्ट ने कहा कि आप जो कह रहे है उसको हलफनामा दायर कर बताए.

याचिकर्ता की तरफ से कहा गया कि श्रीनगर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से ठप्प है. अगर किसी को अस्पताल जाना होगा तो कैसे जाएगा?
SG (सॉलीसिटर जनरल) तुषार मेहता ने कहा कि इनके आरोप बेबुनियाद है. याचिकाकर्ता ने कहा कि हम पब्लिक ट्रांसपोर्ट श्रीनगर में शुरू करने की मांग कर रहे हैं. श्रीनगर में मोबाइल फोन ठप्प है. इंटरनेट ठप्प है, इसको शुरू किया जाए. SG ने कहा कि 10.28 लाख लोगों ने ओपीडी में इलाजा कराया है कश्मीर में 5 अगस्त के बाद. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कहा कि वो जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य करने के लिए कदम उठाएं और इस संबंध में हलफनामा दाखिल करें. SG तुषार मेहता ने कहा कि 5 अगस्त के बाद किसी भी तरफ की जानमाल की हानि जम्मू कश्मीर में नही हुई.

तुषार मेहता ने कहा कि 87 फीसदी कश्मीर में रिस्ट्रिक्शन को हटा दिया गया है. जम्मू में 100 फीसदी और लदाख में 100 फीसदी. SG ने कहा कि 99.90 मेडिकल की दुकानें खुली रहती है. अनाज और एलपीजी सिलेंडर भी बहुतायत में मौजूद है. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर सरकार को हलफनामा दायर करने को कहा हालात सामान्य करने को लेकर सरकार ने क्या कदम उठाए है. कोर्ट ने हालात को सामान्य करने के लिए सरकार को हर संभव कोशिश करने को कहा. जम्मू कश्मीर सरकार और केंद्र सरकार दोनों को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूल और कॉलेजों को सामान्य बहाल करने ते निर्देश दिए

सज्जाद लोन की याचिका पर सुनवाई
जम्मू और कश्मीर के पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और उनकी पार्टी ने धारा 370 को निरस्त करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका को मुख्य मामले के साथ संलग्न किया. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. कोर्ट ने पहले ही सभी 370 को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ में भेजा है. अक्टूबर के पहले सप्ताह में संविधान पीठ सुनवाई करेगी.

गुलाम नबी आजाद की याचिका पर सुनवाई
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा में नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद की याचिका पर सुनवाई शुरू. आजाद ने कोर्ट में कहा कि मैं पूर्व मुख्यमंत्री था. CJI ने कहा कि मैं जानता हूं. आजाद ने कहा कि मैं अपने राज्य में जाना चाहता हूं. दो बार श्रीनगर और एक बार जम्मू में जाने की कोशिश की. मैं अपने क्षेत्र में जाना चाहता हूं. मैं दूसरी मांग पर अभी नही जाना चाहता. बारापुला, अनन्तनाग, श्रीनगर, और जम्मू में जा कर लोगों से मिलना चाहता हूं. मैं कोर्ट को भरोसा देना चाहता हूं कि मैं कोई रैली नही करूंगा. CJI ने कहा कि आजाद ने कहा कि वो राजनीतिक रैली नही करना चाहते, चार जगहों पर जाने की मांग की है. इस पर SG ने कहा कि इनकी याचिका को देखना होगा. CJI ने केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया. गुलाम नबी आजाद को राहत देते हुए कोर्ट ने उन्हें श्रीनगर, अनन्तनाग, जम्मू और बारामुला जाने की इजाजत दी.

बाल अधिकार कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली की याचिका पर सुनवाई
चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट इनाक्षी गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट को अप्रोच करना बहुत मुश्किल है. CJI ने कहा कि ये बेहद गंभीर मामला है. CJI ने कहा कि वो खुद जम्मू कश्मीर के चीफ जस्टिस से बात करेंगे. अगर ऐसा हुआ तो तो वो वो खुद हाई कोर्ट में बैठेंगे, लेकिन अगर ये बात गलत निकली तो आपकी जवाबदेही तय होगी.

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