हैदराबाद: आंध्र प्रदेश में वाईएसआर राजशेखर रेड्डी नए महानायक बन कर उभरे हैं. कांग्रेस पार्टी से बाहर किए जाने के बाद वाईएसआर कांग्रेस बनाने वाले राजशेखर रेड्डी ने आंध्र प्रदेश की विधानसभा से कांग्रेस को ही बाहर कर दिया है. आंध्र प्रदेश में आज लोकसभा चुनावों के परिणाम के साथ विधानसभा चुनावों के भी परिणाम आ रहे हैं. वाईएसआर रेड्डी की आंधी नहीं सुनामी चल रही है. जिस कांग्रेस ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया था आज उसी कांग्रेस की आंध्र प्रदेश में राजनीतिक हैसियत ही खत्म हो गई है. विधानसभा की 175 सीटों के रुझान में वाईएसआर कांग्रेस को 150 सीटों पर बढ़त हासिल है. चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश की सत्ता से बाहर होने जा रहे हैं. वहीं लोकसभा चुनावों के नतीजों में भी वाईएसआर कांग्रेस प्रचंड बहुमत हासिल करने की ओर बढ़ रहा है. आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में वाईएसआर कांग्रेस 23 सीटों पर आगे चल रही है. वहीं चंद्रबाबू नायडु की टीडीपी महज दो सीटों पर आगे चल रही है. राज्य में किसी तीसरे दल का खाता तक नहीं खुला है. जगनमोहन रेड्डी आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे. रेड्डी 30 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

आंध्र प्रदेश मतलब वाईएसआर कांग्रेस
आंध्र प्रदेश की सियासत में जूनियर वाईएसआर की कहानी किसी सुपरहिट फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह लगती है. कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री और जगनमोहन रेड्डी के पिता वाईएसआर रेड्डी की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी. वाईएसआर की मौत के बाद राज्य में शोक की लहर दौड़ गई. कई लोगों ने इस दुखद घटना के शोक में आत्महत्या कर ली. जगनमोहन रेड्डी ने ऐसे तमाम लोगों के परिवार से मिलने के लिए राज्य स्तरीय यात्रा निकाली. कांग्रेस आलाकमान को ये बात नागवार गुजरी. उन्होंने जगनमोहन से यात्रा रद्द करने को कहा लेकिन जगनमोहन नहीं माने. इसके एवज में उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल बाहर किया गया. जगनमोहन ने हार नहीं मानी. उन्होंने यात्रा पूरी की और नए राजनीतिक दल वाईएसआर कांग्रेस बनाने की घोषणा की. वाईएसआर कांग्रेस की स्थापना वर्ष 2011 में हुई.

अपनी स्थापना के आठवें साल ही वाईएसआर कांग्रेस आंध्र प्रदेश की सत्ता संभालने जा रही है. चंद्रबाबू नायडु जो देश भर में घूम कर कांग्रेस के पक्ष में अन्य राजनीतिक दलों को मना रहे थे अपनी ही सत्ता नहीं बचा पाए. चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी की सरकार को जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए सत्ता से बेदखल कर दिया है. 175 सीटों की आंध्र प्रदेश विधानसभा में वाईएसआर कांग्रेस 150 सीटें जीतती हुई नजर आ रही है. अकेले वाईएसआर कांग्रेस को 50 फीसदी से ज्यादा वोट प्राप्त हुए हैं. वहीं जगनमोहन रेड्डी को पार्टी से निकालने वाली कांग्रेस का एक भी सदस्य विधायक नहीं बनने जा रहा है. वाईएसआर ने कांग्रेस को आंध्र प्रदेश से निकाल बाहर किया है. आंध्र प्रदेश की लोकसभा हो या विधानसभा कांग्रेस का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है.

देश की राजनीति का एक बड़ा किरदार बन गए जगनमोहन रेड्डी
विधानसभा हो या लोकसभा आंध्र प्रदेश के हीरो हैं जगनमोहन रेड्डी. विधानसभा में प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही वाईएसआर कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में भी शानदार प्रदर्शन किया है. आंध्र प्रदेश की 25 सीटों में 23 सीटों पर वाईएसआर कांग्रेस आगे चल रही है. वहीं चंद्रबाबू नायडु की तेलगुदेशम पार्टी महज 2 सीटों पर सिमट रही है. कांग्रेस का यहां भी खाता नहीं खुला है. ऐसे में स्पष्ट है कि चाहे वो राज्य की सियासत हो या केंद्र की जगनमोहन रेड्डी अब भारतीय राजनीति के एक बड़े किरदार बन कर उभरे हैं. चंद्रबाबू नायडु की कांग्रेस के लिए कई गई लॉबिंग ने उनकी अपनी ही पार्टी का बेड़ा गर्क कर दिया है. केंद्र में तो खैर कांग्रेस की सरकार नहीं ही आई चंद्रबाबू नायडु ने अपना मुख्यमंत्री पद भी गंवा दिया है. दिल्ली की गद्दी पर जो भी बैठे एक बात तो साफ है जगनमोहन रेड्डी और वाईएसआर कांग्रेस को नजरअंदाज करना अब किसी के बस की बात नहीं है. आंध्र प्रदेश के नतीजे ये भी बताते हैं कि जब जनता आपको पसंद करती है तो वो किसी भी हद तक जाने को तैयार होती है.

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