मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर में अक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) यानी चमकी बुखार के चलते मरने वाले बच्चों की संख्या 80 के ऊपर जा चुकी है वहीं बिहार में यह बीमारी अब तक 100 मासूमों की जिंदगी छीन चुकी है. आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने मुजफ्फरपुर के श्री कृष्‍णा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल का दौरा किया और डॉक्‍टरों से बात की. मेडिकल कॉलेज ने रविवार को तीन और बच्‍चों के मौत की पुष्टि की है. डॉक्टर हर्षवर्धन के सामने ही एक बच्ची ने दम तोड़ दिया. इस बीच बिहार सरकार के मंत्री सुरेश शर्मा ने एईएस से मौतों पर कहा है कि राज्‍य सरकार शुरू से ही इस बीमारी पर काम कर रही है. दवाइयों की कोई कमी नहीं है. हालांकि उन्‍होंने माना कि वर्तमान में आपात स्थिति को देखते हुए बेड और आईसीयू की कमी है.

भीषण गर्मी के बीच बिहार के मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के जिलों में फैले दिमागी बुखार से 15वें दिन शनिवार को 12 बच्चों की मौत हो गई. आठ मौत एसकेएमसीएच व चार मौत कांटी पीएचसी में हुई. इसमें तीन इलाजरत बच्चों की मौत हुई है. वहीं, एसकेएमसीएच व केजरीवाल अस्पताल मिलाकर 54 नए मरीज भर्ती हुए. एसकेएमसीएच में 34 व केजरीवाल अस्पताल में 20 नए बच्चे भर्ती कराए गए. अबतक चमकी बुखार के 300 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें 100 बच्चों ने दम तोड़ दिया.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम मुजफ्फरपुर में
बता दें कि लगातार हो रही मौतों के कारणों की जांच के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम मुजफ्फरपुर में है. वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इलाके में चिलचिलाती गर्मी, नमी और बारिश के ना होने के चलते लोग हाइपोग्लाइसीमिया (शरीर में अचानक शुगर की कमी) के कारण लोगों की मौत हो रही है. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया था कि चमकी के कारण हो रही मौतों का कारण लीची भी हो सकती है. कहा जा रहा है कि मुजफ्फरपुर के आस-पास उगाई जाने वाली लीची में कुछ जहरीले तत्व हैं.

लगातार मर रहे हैं बच्चे, प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल
इस बीच मरीजों के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि श्री कृष्‍णा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में रात के समय डॉक्‍टर नहीं रहते हैं, जिससे उन्‍हें काफी परेशानी होती है. उनका कहना है कि रात के समय केवल नर्स रहती है. एक तीमारदार ने कहा कि हॉस्पिटल में रोज बच्‍चे मर रहे हैं लेकिन यहां पर सुविधाओं का काफी अभाव है. मुजफ्फरपुर में इंसेफलाइटिस से सैकड़ों बच्चों की मौत अब हर साल की बात हो गई है. पिछले कुछ सालों में मुजफ्फरपुर में लगातार इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौतें हो रही हैं लेकिन अभी तक सरकार या मेडिसिन जगत से जुड़े लोग इसका हल नहीं निकाल पाए हैं. इसी बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने एक विवादित बयान दिया है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘बच्चों की मौत के लिए न प्रशासन जिम्मेदार है और न ही सरकार. बच्चों की किस्मत ठीक नहीं थी. मौसम भी इसके लिए जिम्मेदार है. सरकार ने इलाज के लिए पूरे इंतजाम किए थे.’ इलाज कराने आए ज्यादात्तर बच्चों के मां-बाप गरीब हैं इसलिए सैकड़ों बच्चों की मौत भी राष्ट्रीय विमर्श का मुद्दा नहीं बन पा रही है. बहरहाल नौनिहालों की इतनी बड़ी संख्या में मौत बिहार के लिए शोक और शर्म दोनों की घड़ी है.

नीतीश के मुजफ्फरपुर न जाने पर उठ रहे सवाल
बता दें कि मौसम में तल्खी और हवा में नमी की अधिकता के कारण होने वाले वाले इस बुखार को लेकर राज्य के सीएम नीतीश कुमार भी चिंता जता चुके हैं. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को इस पर नजर बनाए रखने को कहा था. हालांकि उनके अब तक मुजफ्फरपुर का दौरा न करने पर सवाल उठ रहे हैं. यह बीमारी हर साल इसी मौसम में मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के इलाकों के बच्चों को अपनी चपेट में लेती है. एईएस से पीड़ित अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी और कुछ बच्चों के शरीर में सोडियम (नमक) की मात्रा भी कम पाई जा रही है.

अक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) होता क्या है:
अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी AES शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और वह भी खासतौर पर बच्चों में. इस बीमारी के लक्षणों की बात करें तो
शुरुआत तेज बुखार से होती है
-फिर शरीर में ऐंठन महसूस होती है
-इसके बाद शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है
-मानसिक भटकाव महसूस होता है
-बच्चा बेहोश हो जाता है
-दौरे पड़ने लगते हैं
-घबराहट महसूस होती है
-कुछ केस में तो पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है
-अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मौत हो जाती है आमतौर पर यह बीमारी जून से अक्टूबर के बीच देखने को मिलती है.

हॉस्पिटल पहुंचे केंद्रीय हेल्थ मिनिस्टर डॉक्‍टर हर्षवर्धन
केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने गर्मी से मौत पर दुख जताते हुए लोगों को घरों से न निकलने की सलाह दी है. उन्होंने पटना में कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हीटस्ट्रोक से लोगों की मौत हो रही है. मैं लोगों को सलाह दूंगा कि जब तक तापमान कम न हो घर से बाहर न निकले. प्रचंड गर्मी से दिमाग पर असर पड़ता है और फिर इससे कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं.’ बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से मरने वाले बच्चों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन की मौजूदगी में एक बच्ची ने दम तोड़ दिया है. इसी के साथ चमकी बुखार से मरने वालों की संख्या 84 हो गई है. बता दें कि हालात का जायजा लेने के लिए डॉ हर्षवर्धन मुजफ्फरपुर में हैं.बच्ची की मां के मुताबिक बच्ची की मौत चमकी बुखार के कारण हुई है. वह 5 साल की थी. उसका नाम निशा है और वह राजेपुर की रहने वाली थी.

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