कोलकाता: पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के लेकर चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक ने भी एक बयान दिया है. चुनाव आयोग के विशेष पर्यवेक्षक अजय वी नायक ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए प्रदेश की पुलिस पर जनता का भरोसा नहीं है. इस कारण से यहां के मतदान केंद्रों पर राज्य पुलिस की जगह केंद्रीय बलों की मांग बढ़ गई है.

इतना ही नहीं अब के पश्चिम बंगाल के हालात देखें तो प्रदेश में 15 साल पुराने बिहार जैसे हालात हैं. इसके आगे नायक ने कहा कि जब बिहार की जनता इस माहौल और ऐसे हालातों को बदलने में कामयाब हो गए तो बंगाल में क्यों नहीं हो पा रहा है.

मीडिया से बात करते हुए नायक ने कहा जब बिहार में इस तरह के हालात थे तो वहां भी प्रदेश की जनता राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं करती थी. वोटिंग के समय वहीं भी राज्य पुलिस की जगह केंद्रीय बलों को ही लगाया जाता था. लेकिन अब बिहार के हालात बहुत सुधर चुके हैं और वहां पर बहुत ही कम मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बल को लगाया जाता है. वी नायक इससे पहले बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) भी रह चुके हैं और वह 1984 बैच के आईएएस भी रहे हैं.

वहीं तृणमूल कांग्रेस ने वी नायक के इस बयान के लिए चुनाव आयोग के पास शिकायत पत्र दिया है. टीएमसी ने चुनाव आयोग को दिए गए इस शिकायत पत्र में विशेष निरीक्षक अजय वी नायक को हटाने की मांग की है. इसके साथ ही उनके इस बयान के लिए उन्होंने शिकायत पत्र में लिखा कि अजय वी नायक का बयान न सिर्फ आपत्तिजनक है बल्कि अमर्यादित है.

यहां पढ़ें तृणमूल कांग्रेस का चुनाव आयोग को शिकायत पत्र

                                   

 

चुनाव आयोग ने अजय वी नायक को पश्चिम बंगाल में होने वाले अंतिम पांच चरणों के चुनाव की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है. प्रदेश में 23 अप्रैल को होने वाले तीसरे चरण का मतदान पांच लोकसभा सीटों पर होना है. जिसमें पश्चिम बंगाल की बलूरघाट, मालदा उत्तरी, मालदा दक्षिणी, जांगीपुर और मुर्शिदाबाद शामिल हैं. इन सीटों पर होने वाले मतदान के लिए केंद्रीय बलों की 324 कंपनियों को तैनात किया जाएगा, जो 92 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर निगरानी रखेंगी.

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