उदयपुर, उदयपुर में हुए कांग्रेस चिंतन शिविर में शुक्रवार को परिवारवाद पर गहन मंथन हुआ है. खबर है कि जल्द ही पार्टी वन टिकट वन फैमिली का फॉर्मूला लागू कर सकती यही. अगर ऐसा होता है तो एक परिवार से सिर्फ एक ही सदस्य को टिकट मिलेगा, लेकिन क्या सही मायनों में कांग्रेस पार्टी इस फॉर्मूले पर अमल कर पाएगी? क्या अपने ऊपर लगे परिवारवाद के आरोपों को कांग्रेस हटा पाएगी?

पीएम मोदी का परिवारवाद पर वार

अब कांग्रेस पर परिवारवाद को लेकर सबसे ज्यादा भाजपा हमलावर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर परिवारवाद को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिवारवाद को बड़ा मुद्दा बनाया था. उन्होंने कहा था कि एक ही परिवार के एक या दो सदस्यों का चुनाव जीतना और एक ही पार्टी के लोगों को पार्टी का महत्वपूर्व पद दिया जाना बहुत बड़ी बात है.

जब भी किसी पार्टी में बड़े पद एक ही परिवार के लिए फिक्स हो जाते हैं, तब सबसे ज्यादा नुकसान टैलेंट का होता है, और इससे पार्टी का भी नुकसान होता है. पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया था कि जब भी किसी पार्टी में परिवारवाद ज्यादा होता है तो वहां पर परिवार ही सुप्रीम बन जाता है, पार्टी बचे या ना बचे, देश बच पाए या ना बच पाए, सबकुछ एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमने लगता है.

अब पीएम मोदी ने तो सिर्फ परिवारवाद को लेकर कांग्रेस पर सिर्फ वार किया था, लेकिन देश की सबसे बड़ी पार्टी ने इस मुद्दे पर मंथन कर, वन टिकट वन फैमिली का फॉर्मूला निकाल ये साफ कर दिया कि उन्हें भी इस बात का एहसास है कि पार्टी में परिवारवाद की जड़े काफी मजबूत हैं और इससे पार्टी को काफी नुकसान पहुँच रहा है. अब कांग्रेस का ये कबूलनामा ही कहीं ना कहीं उन्हें एक बार फिर बीजेपी के निशाने पर लाने वाला है.

 

 

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