बलिया: एससी-एसटी एक्ट के विरोध सवर्णों द्वारा बुलाए गए भारत बंद का मिला जुला असर सामने रहा. इस बीच बैरिया के बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह भी मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ खुलकर सड़क पर उतरे. बलिया और बलिया के ग्रामीण इलाकों में बंद का मिला जुला असर दिखाई पड़ा. कई जगह छिटपुट हिंसा भी हुई इस दौरान पथराव में छह पुलिसकर्मी औऱ तीन अन्य लोग घायल हो गए.

इस दौरान बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ हैं. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें दलित या मुस्लिमों ने नहीं, सवर्णों ने विधायक बनाया है. सवर्ण जो चाहेंगे, वह कुर्बानी देने को तैयार हैं. सुरेंद्र सिंह ने आगे कहा कि अगर सवर्ण कहेंगे कि त्यागपत्र दे दो तो वह पीछे नहीं हटेंगे. बंद समर्थकों की बीजेपी के बलिया सदर के विधायक आनंद स्वरूप शुक्ला से भी आंदोलन में उतरने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने मना कर दिया. इस बात पर बंद समर्थकों की विधायक शुक्ला से झड़प हुई.

पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली के मुताबिक, बंद के दौरान दो पक्षों के बीच पथराव हुआ जिसमें पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और छह पुलिसकर्मी घायल हो गए. बैरिया थाना क्षेत्र के बीबी टोला में झड़प में तीन लोग घायल हो गए. एससी-एसटी कानून में संशोधन कर उसे मूल स्वरूप में बहाल किए जाने के विरोध में गड़वार थाना क्षेत्र के चिलकहर ग्राम में बंद समर्थकों ने सड़क जाम कर दी. पुलिस ने इन्हें सड़क से हटाना चाहा तो उन्होंने पथराव कर दिया जिसमें छह पुलिसकर्मी घायल हो गए. 

बता दें कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जजों की बैंच ने एक फैसले में एससी-एसटी एक्ट में कई बदलाव कर दिए थे. इस फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया. इस बंद का देशव्यापी असर दिखाई दिया. इस बीच बीजेपी के दलित सांसदों और मंत्रियों ने भी मोदी सरकार पर एससी एसटी एक्ट को पुराने स्वरूप में बहाल करने का दवाब डाला. इसके बाद मोदी सरकार ने बिल लाकर इसे पुराने स्वरूप में कर दिया. इसके विरोध में सवर्णों ने भारत बंद बुलाया था. 

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