नई दिल्ली. एनसीपी नेता अजित पवार बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री बन गए. अब उनके दाग भी धुल गए हैं, क्योंकि महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के सूत्रों के अनुसार समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को 70,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के खिलाफ दर्ज 20 एफआईआर में से 9 की जांच बंद कर दी है. अजित पवार पर 70,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप था जो कांग्रेस-राकांपा-शासन के दौरान हुआ था.

समाचार एजेंसी एएनआई से वरिष्ठ अधिकारी परमबीर सिंह ने कहा कि हम सिंचाई संबंधी शिकायतों में लगभग 3,000 निविदाओं की जांच कर रहे हैं. ये नियमित पूछताछ हैं और सभी बंद चल रही जांच जारी हैं. इसके साथ ही इस संबंध में अजित पवार ने कहा आज जो भी मामले बंद हुए उनमें से कोई भी मुझसे से संबंधित नहीं है. सूत्रों ने बताया कि इस मामले को लेकर एक नोट तैयार किया गया था क्योंकि एजेंसी को महाराष्ट्र सिंचाई घोटाले की जांच में अदालत में स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी.

बता दें कि फडणवीस और भाजपा ने हमेशा भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अजीत पवार पर निशाना साधा है. साल 2014 में, मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने जो पहली कार्रवाई की, उसमें सिंचाई घोटाले में अजीत पवार की कथित भूमिका की जांच को मंजूरी देना था. पिछले महीने के महाराष्ट्र चुनाव से ठीक पहले, अजीत पवार और शरद पवार दोनों को प्रवर्तन निदेशालय ने एक सहकारी बैंक घोटाले से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था.

हालांकि अब अजित पवार ने भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बना ली है. जहां वसेना-एनसीपी-कांग्रेस पर ताल ठोकते ही रह गए और अजित पवार ने डिप्टी सीएम व दवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ली. डिप्टी सीएम के रुप में अजित पवार ने दावा किया कि राकांपा के सभी 54 विधायक उनके साथ थे.

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