नई दिल्ली. 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियां राजनीतिक पार्टियों ने ही नहीं बल्कि चुनाव आयोग ने भी शुरू कर दी हैं. चुनाव आयोग ने चुनाव रिफॉर्म पर आम राय बनाने के लिए सोमवार (27 अगस्त) को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. दिल्ली में होने वाली इस बैठक में राष्ट्रीय दलों के अलावा क्षेत्रीय पार्टियां भी शामिल होंगी.

बता दें कि विपक्ष चाहता है कि चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पैपर पर हो. वहीं सत्तारूढ़ दल बीजेपी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने पर जोर दे रही हैं. चुनाव आयोग ने दोनों ही तरफ की मांगों को मानने से इंकार कर दिया है. माना जा रहा है कि इस सर्वदलीय बैठक में यह मुद्दा एक बार फिर से उठ सकता है. इस मीटिंग को चुनाव आयोग ने सामान्य बताते हुए कहा है कि राजनीतिक पार्टियों से चुनाव सुधार की दिशा में बात होती रही है.

बता दें कि बीजेपी, कांग्रेस, बीएसपी सहित देश में सात राष्ट्रीय दल हैं. इन दलों के अलावा चुनाव आयोग ने 51 क्षेत्रीय और दूसरे राजनीतिक दलों को बुलाया है. चुनावों में खर्च को कैसे सीमित किया जाए और बेहतर उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व कैसे बढ़े? मीटिंग की बातचीत का यह एजेंडा रखा गया है. सभी पार्टियों से इन बातों पर राय सुमारी की जाएगी. इस मीटिंग में चुनाव खर्च पर नियंत्रण करने, विधान परिषद के चुनावों के खर्च की सीमा तय करने और राजनीतिक दलों का खर्च सीमित करने के विषय पर विचार विमर्श किया जाएगा.

इसके अलावा चुनाव प्रचार बंद होने का समय और प्रिंट मीडिया को शामिल करने सहित मतदान समाप्त होने से पहले अंतिम 48 घंटों के दौरान सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन मीडियम पर प्रचार के बारे में गाइडलाइंस बनाने संबंधी मामलों पर भी विचार होगा. माना जा रहा है कि जो पार्टियां अभी चुनावों को लेकर सक्रिय नहीं हैं वे भी इस मीटिंग के बाद चुनावी रणनीति बनाने में जुट जाएंगी.

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