नई दिल्लीः यूपी निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के एक दिन बाद ही ईवीएम के विरोध में विपक्षी दलों ने अपने स्वर तेज कर दिए हैं और साथ ही भविष्य में होने वाले सभी चुनाव ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से कराए जाने की मांग की है . समाचार एजेंसी पीटीआई ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है. यूपी निकाय चुनाव में भाजपा ने अपना डंका बजाते हुए शहरी इलाकों में 14 मेयर पदों पर कब्जा किया है, पार्षदों के चुनाव में भी भाजपा को उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली है.

मेयर पद की दो सीटों पर कब्जा करते हुए बीएसपी ने यूपी की सत्ता में अपनी वापसी की उम्मीद जगाई है. लेकिन साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी पर ईवीएम में गड़बडी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि, अगर भाजपा ईमानदारी पार्टी है तो वो 2019 के लोकसभा चुनाव ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से कराए. मायावती के बाद यूपी के पूर्व सीएम ने भी बीजेपी पर निशाना साधा. इन सबके बीच यूपी निकाय चुनाव में ईवीएम और बैलेट पेपर से हुए चुनाव परिणामों के तुलनात्मक आंकडे भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा है कि, ‘बैलेट पेपर वाले चुनावी इलाकों में भाजपा को केवल 15 सीटें मिली हैं और ईवीएम वाले इलाकों में 46 फीसदी सीटें मिली हैं’. यूपी में 16 नगर निगम के मेयर पदों के लिए ईवीएम से वोट डाले गए थे जिसमें बसपा ने दो और भाजपा ने 14 सीटों पर जीत हासिल की है. नगर पंचायत अध्यक्ष पद की बात करें तो इस पद के लिए कुल 438 पदों के लिए हुए चुनाव में सभी सीटों पर बैलेट पेपर से वोटिंग हुई थी और इस पर पद भाजपा को 438 में से कुल 100 सीटों पर जीत हासिल हुई है. दूसरी तरफ नगर पंचायत सदस्य पद के लिए 5434 सीटों पर भी बैलेट पेपर से मतदान हुआ था जिसमें भाजपा को केवल 664 सीटों पर ही जीत मिल सकी यानी भाजपा को मात्र 12.22 फीसदी सीटों पर ही जीत मिल सकी. इसी तरह नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की 198 सीटों पर हुए चुनाव में सभी सीटों पर बैलेट पेपर से मतदान हुआ है जहां बीजेपी को केवल 70 सीटों पर जीत मिली है यानी बीजेपी को केवल 35.35 प्रतिशत सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी, नगर पालिका परिषद के सदस्य पद के लिए भी 5261 सीटों पर बेलेट पेपर से मतदान हुआ जिसमें भाजपा को केवल 922 सीटों पर जीत मिली और 4339 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा है.

ईवीएम के विरोध में पहले भी स्वर उठते रहे हैं लेकिन उत्तर प्रदेश निकाय चुनावों के बाद लगभग सभी विपक्षी दल एक आवाज में ईवीएम के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं. और भविष्य में होने वाले सभी चुनावों को बैलेट पेपर से कारवाए जाने की मांग कर रहे हैं.

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