मुंबई. NIA की पूर्व वकील रोहिणी सालियान ने उस पुलिस ऑफिसर के नाम का खुलासा कर दिया है जिसने उनसे मालेगांव के आरोपियों के प्रति नरमी बरतने के लिए कहा था. सालियान के मुताबिक NIA के एसपी सुहास वर्के ने उन पर केस कमज़ोर करने का दबाव बनाया था. 
 
गौरतलब है कि सालियान ने 3 महीने पहले इंडियन एक्सप्रेस को जो इंटरव्यू दिया था उसमें उन्होंने कहा था कि उनके ऊपर दबाव डाला गया कि वह आरोपियों को लेकर नरम रवैया अपनाएं या फिर केस को कमज़ोर करें.
 
सालियान ने ऐफिडेविट में कहा था- … मैं एनआईए ऑफिसर का नाम का खुलासा कर रही हूं जिन्होंने एक मैसेंजर के तौर पर न्याय की प्रक्रिया को बाधित करने के लिए हस्तक्षेप करने की कोशिश की है. उनका नाम सुहास वर्के है और वह एनआईए की मुंबई ब्रांच में एसपी हैं.
 
बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल किया एफिडेविट
 
इस ऐफिडेविट को रोहिणी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में फाइल किया था और अब यह सुप्रीम कोर्ट में सब्मिट किया जा चुका है. इसके साथ ही एक पिटीशन भी दायर की गई है जिसमें ऐफिडेविट में किए गए खुलासों पर गौर करने के लिए कहा गया है. साथ ही कहा है कि एनआईए के खिलाफ उचित आदेश जारी किए जाएं.
 
अपने ऐफिडेविट में सालियान ने इंडियन एक्सप्रेस के 25 जून को छपे इंटरव्यू का भी हवाला दिया है. उन्होंने इस घटना के जून 2014 के तीसरे हफ्ते में होने की बात कही है और कहा है- मैं यह एक बार फिर से दोहराना चाहती हूं और इस बात की पुष्टि करती हूं कि मैंने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को जो इंटरव्यू दिया था.. वह पूरी तरह से सही है और सच है.
 
29 सितंबर 2008 में मालेगांव ब्लास्ट
29 सितंबर 2008 में हुए मालेगांव बम धमाके में 4 लोगों की जान चली गई थी जबकि 79 लोग घायल हो गए थे. इसी वक्त पर गुजरात के मोडासा में धमाका हुआ था जिसमें एक शख्स मारा गया था. एनआईए ने इस मामले की जांच की और बॉम्बे हाई कोर्ट में चले इस केस की कमान जब 2011 और 2013 के बीच रोहिणी सालियान के हाथ में थी, तब चार लोगों को जमानत दी गई थी. मामले में 14 लोग आरोपी थे.

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