भोपाल. पीएम मोदी ने 10वें विश्व सम्मेलन के उद्घाटन में कहा कि उनकी मातृ भाषा हिंदी नहीं है लेकिन इसकी ताकत का मुझे अहसास है, हिंदी के बिना मैं यहां नहीं होता. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि हिंदी का आंदोलन चलाने वाले ज्यादातर गैर हिंदी भाषी ही थे. इसके साथ ही मोदी ने अपने हिंदी सीखने की कहानी रोचक ढ़ंग से बताई. उन्होंने यूपी के दूध बेचने वाले उन लोगों का जिक्र किया जो उनके गांव में आते थे और मोदी उन्हें चाय बेचने जाते थे. इसी दौरान उन्होंने, उनकी सोहबत में हिंदी भाषा पर अपनी पकड़ मजबूत की.
 
मोदी ने कहा कि हमें भाषा की विरासत को बचा कर रखना होगा. मोदी के अनुसार भाषा के लुप्त होने पर ही हमें उसकी अहमियत पता लगेगी. इस बीच 10वां विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन आज भोपाल में शुरू हो गया. 10 से 12 सितंबर, 2015 तक चलने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. 32 साल बाद देश में होने जा रहे इस सम्मेलन का आयोजन लाल परेड ग्राउंड, भोपाल में किया गया है. देश-विदेश के 5000 से ज्यादा विद्वान और मेहमान सम्मेलन में भाग लेंगे. 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन की थीम ‘हिंदी जगत : विस्तार एवं संभावनाएं’ है. तीन दिन तक समानांतर सत्रों में विद्वान और प्रतिभागी 12 विषयों पर अपने विचार रखेंगे.
 
 

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