नई दिल्ली. वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर एक और दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद पूर्व सैनिकों ने शुक्रवार को कहा कि एनडीए सरकार इस योजना के क्रियान्वयन का इरादा नहीं रखती.
 
पूर्व सैनिकों के संयुक्त मंच के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त सतबीर सिंह ने कहा कि सरकार वन रैंक वन पेंशन का क्रियान्वयन नहीं चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के कुछ लोग वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे को कठिन बना रहे हैं. चूंकि सरकार हर पांच साल पर पेंशन में वृद्धि करने के अपने रुख से पीछे हटने को राजी नहीं है, लिहाजा वार्ता विफल हो गई है. 
 
सिंह के साथ जब पूर्व सैनिकों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार शाम को मिलने गया, तो वह उनसे नहीं मिले. सिंह ने कहा, ‘हम सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग के कार्यालय में थे. बार-बार फोन करने के बावजूद हमें बताया गया कि प्रधान सचिव प्रधानमंत्री के साथ व्यस्त हैं. लेकिन संयुक्त सचिव के माध्यम से एक संदेश भेजा गया कि पेंशन वृद्धि प्रत्येक पांच वर्ष पर होगी. हमने समझौता करने से इंकार कर दिया.’ 
 
कहां है विवाद?
सरकार ने शुरुआत में कहा था कि पेंशन प्रत्येक 10 साल पर बढ़ाया जाएगा और पूर्व सैनिक प्रत्येक दो वर्ष पर ऐसा करने के लिए दबाव बना रहे हैं. पूर्व सैनिक तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि भी चाहते हैं. सरकार और पूर्व सैनिकों के बीच एक विवाद योजना के क्रियान्वयन की तिथि को लेकर है. पूर्व सैनिक इसका क्रियान्वयन अप्रैल 2014 से चाहते हैं, जबकि सरकार अप्रैल 2015 से चाहती है.  
 
यदि योजना अप्रैल 2014 से लागू होती है तो पूर्व सैनिकों को लगभग 12,000 करोड़ रुपये बकाए के रूप में भुगतान करना होगा. पूर्व सैनिक दो महीने का बकाया छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन सरकार ने कहा कि योजना के क्रियान्वयन की तिथि सितंबर 2014 रखा जाए. इसे भी खारिज कर दिया गया. पूर्व सैनिकों ने सातवें वेतन आयोग के तहत पेंशन वृद्धि के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया. पूर्व सैनिकों के आंदोलन का शुक्रवार 75वां दिन था. छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जबकि चार अस्पताल में भर्ती हैं.
 
IANS

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