नई दिल्ली. गुजरात में पटेल आरक्षण की मांग पर हार्दिक पटेल डटे हुए हैं. हार्दिक ने आज होने वाले आंदोलन में कोई बदलाव नहीं किया है. आज गुजरात के अहमदाबाद में पटेल समुदाय की बड़ी रैली होगी जिसमें 25 लाख लोगों के हिस्सा लेगे. हालांकि गुजरात की सीएम आनंदी बेन पटेल पहले ही कह चुकी हैं कि वो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन कर रही है, ऐसे में पटेल समुदाय को आरक्षण देना मुमकिन नहीं है. 
 
उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बीजेपी नीत गुजरात सरकार के साथ एक बैठक में पटेल समुदाय द्वारा ओबीसी दर्जे की मांग को लेकर जारी आरक्षण आंदोलन को सुलझाने का प्रयास करने का फैसला किया है. आरएसएस प्रवक्ता प्रदीप जैन ने कहा कि आज यहां हुई आरएसएस की समन्वय बैठक में हमने राज्य की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की जहां आरएसएस के सदस्यों ने इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं जाहिर कीं. जैन ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक अपने प्रयास करेंगे ताकि सामाजिक सौहार्द और समरसता बनी रहे. उन्होंने कहा कि गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने भी आरएसएस की बैठक में भाग लिया.
 
उधर, सात मंत्रियों की समिति का नेतृत्व कर रहे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने पटेल समुदाय के नेताओं से कहा कि गुजरात सरकार की समुदाय को आरक्षण देने में ‘सीमाएं’ हैं. मंगलवार को पटेल समुदाय की रैली से पहले गुजरात सरकार ने पटेल समुदाय के नेता हार्दिक पटेल को  बातचीत के लिए बुलाया है.
 
आनंदी बेन आरक्षण से इंकार कर चुकी हैं
गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल ने सूबे में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करने वालों को बड़ा झटका दिया है.  आनंदीबेन ने साफ कर दिया है कि पाटीदार समाज को आरक्षण नहीं दिया जाएगा. आनंदीबेन ने कहा सरदार पटेल के नाम पर आरक्षण की मांग उनका अपमान है. आनंदीबेन का कहना है कि पटेल समुदाय को ओबीसी में शामिल नहीं किया जा सकता.
 
क्या कह रहा है पाटीदार समुदाय
पाटीदारों का कहना है कि उनके साथ नाइंसाफी हो रही है और अब उन्हें इंसाफ चाहिए. पाटीदारों  की मांग है कि उनके समाज को ओबीसी में शामिल करके आरक्षण का लाभ दिया जाए. पाटीदार समुदाय की आरक्षण की मांग के विरोध में ओबीसी एकता मंच ने मोर्चा खोल दिया है. ओबीसी आरक्षण का फायदा उठा रहे ठाकोर, चौधरी और रबारी जैसे ओबीसी वर्ग के लोगों ने पाटीदार समुदाय की मांग पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. इनका कहना है कि पाटीदार समुदाय पहले से ही काफी आगे है इसलिए उनको ओबीसी में शामिल करना जायज नहीं होगा.
 
कौन हैं पाटीदार ?
पाटीदार समुदाय के लोग खुद को भगवान श्रीराम का वंशज कहते हैं. उनके मुताबिक वो श्रीराम के बेटे लव और कुश की संतान हैं. लव के वंश से नाता जोड़ने वाले पाटीदार खुद लेउवा पाटीदार कहते हैं. कुश के वंश से नाता जोड़ने वाले पाटीदार खुद कडवा पाटीदार कहते हैं. पाटीदारों की चार मुख्य जातियों में से लेउवा और कडवा पाटीदार को आरक्षण नहीं मिला है.
 
हार्दिक पटेल भी कडवा पाटीदार समुदाय से आते हैं. हार्दिक पटेल के दो महीने के आंदोलन के बाद गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल ने 7 मंत्रियों की एक समिति बना दी है जो मांगों पर विचार कर रही है लेकिन हार्दिक पटेल का कहना है कि इस समिति पर उन्हें कोई भरोसा नहीं है. हार्दिक पटेल का कद जिस चमत्कारिक ढंग से बढ़ा है उसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. माना ये जाता है कि इस आंदोलन के पीछे सत्तारुढ बीजेपी के कुछ नेताओं का भी हाथ है, जो आनंदीबेन पटेल की मौजूदा सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं. बीजेपी के वरिष्ठ नेता पुरुषोत्तम रुप्पाला भी मानते हैं कि सरकार को अस्थिर करने की ये साजिश हो सकती है.
 
बीजेपी के लोग कह रहे हैं कि ये आंदोलन कांग्रेस के बिना परवान नहीं चढ़ सकता था. वही राज्य सरकार में श्रम, रोजगार और परिवहन विभाग के मंत्री विजय रुपाणी का कहना है कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत कर रही है और पूरे मसले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा. लेकिन हार्दिक ने गुजरात में नरेंद्र मोदी से विरासत में मिली सीएम की कुर्सी संभालने वाली आनंदीबेन के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है. 25 अगस्त को अहमदाबाद में एक महारैली बुला रहे हैं हार्दिक पटेल और दावा किया जा रहा है कि इस रैली में 25 लाख से ज्यादा लोग आ सकते हैं. जिस गुजरात को नरेंद्र मोदी ने विकास का आईना बनाया था उसमें अब आंदोलनों की छाया बनकर नजर आ रहे हैं हार्दिक पटेल.
 
एजेंसी इनपुट भी 

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