लखनऊ : समाजवादी पार्टी में जारी घमासान खत्म होने की बजाए लगातार बढ़ता जा रहा है. अब मुलायम सिंह यादव के दो अलग-अलग दस्तखत से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर पार्टी के फैसले कौन ले रहा है ?
 
1 जनवरी को जारी की गई दो चिट्ठियां जिनमें से एक में रामगोपाल यादव का पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासन का आदेश था और दूसरी जिसमें पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमय नंद को पार्टी से निकालने का आदेश था, दोनों में ही मुलायम के दस्तखत में काफी अंतर है.
 
दोनों ही चिट्ठियां कुछ ही समय के अंतराल में एक जनवरी को जारी की गई थी, लेकिन मुलायम के अलग-अलग हस्ताक्षर ने यह सवास खड़ा कर दिया है कि क्या पार्टी के फैसले कोई और ले रहा है. ऐसे में मुलायम का असली सिग्नेचर कौन सा है यह भी अहम सवाल है.
 
 
बता दें कि यूपी सीएम अखिलेश यादव पहले ही यह जता चुके हैं कि मुलायम सिंह पर कुछ लोगों ने काबू पा लिया है. उन्होंने रविवार को कहा था कि कुछ लोग अपने मनमुताबिक फैसले करवा रहे हैं और कागजात पर मुलायम के दस्तखत लिए जा रहे हैं. उन्होंने पार्टी में बाहरी व्यक्तियों के दखल की बात करके अपनी चिंता पहले ही व्यक्त की थी.
 
अब जब मुलायम के दो अलग-अलग हस्ताक्षर सामने आ रहे हैं तो यह सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई कोई और मुलायम की जगह पार्टी में फैसले ले रहा है. अखिलेश ने कहा था कि चुनाव को केवल 3 महीने बाकी हैं और कहा नहीं जा सकता कि कैसे दस्तावेज में मुलायम से दस्तखत करवा लिए जाएं, इसी वजह से पार्टी के हित में उन्हें दखलअंदाजी करनी पड़ रही है.
 
 
बता दें कि इस वक्त मुलायम सिंह यादव इस वक्त दिल्ली में मौजूद हैं और उन्होंने आज आजम खान को दिल्ली बुला लिया है. उन्होंने गायत्री प्रसाद को भी बुलाया है. कहा जा रहा है कि मुलायम पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ बैठक करेंगे.
 

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