लखनऊ : समाजवादी पार्टी के ‘दंगल’ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रामगोपाल मिलकर आखिरी दांव चल दिया है. लखनऊ में बुलाए गए अधिवेशन में मंच से रामगोपाल ने अखिलेश को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया है.
वहीं मुलामय सिंह यादव को मार्गदर्शक बना दिया गया है. शनिवार को हुए कई घटनाक्रमों के बाद जब आजम और लालू यादव की पहल  पर शिवपाल और अखिलेश को शांत कराया गया था उसी समय में माना जा रहा था कि मामला अभी थमा नहीं है.
क्योंकि जिन बिंदुओंं पर सहमति बनी थी कि उसमें अखिलेश जीत कर भी उनके हाथ कुछ नहीं लगा था. शनिवार को अखिलेश को खेमें जहां 200 से ज्यादा विधायक थे वहीं मुलायम के घर में सिर्फ 70 के ही आसपास सपा नेता और विधायक मौजूद थे.
अधिवेशन में किए गए ऐलान 
1- मुलायम को हटाकर अधिवेशन में अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया.
2- मुलायम सिंह यादव अब पार्टी के मार्गदर्शक.
3- अमर सिंह को पार्टी से बाहर निकाला गया.
4- शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष से हटाया गया.

अखिलेश क्यों हुए बगावत को मजबूर
शनिवार को कराई गई शांति में अखिलेश के हाथ कुछ नहीं लगा. उनकी प्रमुख भी मांगे भी नहीं मानी गईं थी और शिवपाल ने पहले ही आकर बोल दिया कि मामला सुलझ गया है.
1- अखिलेश चाहते थे कि उन्हें सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया जाए
2- शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाए
3- टिकट बांटने का अधिकार मिले
4- अमर सिंह को पार्टी निकाला जाए

लेकिन इनमें से कोई भी बात नहीं मानी गई जबकि अखिलेश ने पार्टी के अंदर अपनी ताकत को दिखा दिया था. लेकिन राजनीति के मंझे खिलाड़ी मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे को बिना कोई आश्वासन दिए ही मामले को शांत करा लिया.
लेकिन शाम तक बात फिर बिगड़ गई जब रामगोपाल यादव ने ऐलान कर दिया कि रविवार को बुलाया गया अधिवेशन रद्द नहीं किया जाएगा. इसके बाद तय हो गया था कि सपा के दंगल में आखिरी दांव बाकी है.
वहीं आज सुबह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने इस राष्ट्रीय अधिवेशन को असंवैधानिक करार दिया और चेतावनी दी की जो भी जाएगा उसके खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जाएगी.
उनकी इस चेतावनी का किसी के ऊपर भी असर नहीं पड़ा और अखिलेश और रामगोपाल यादव के साथ बड़ी संख्या में सपा के कार्यकर्ता और नेता पहुंच गए.

 

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