नई दिल्ली : नजीब जंग के दिल्ली के उप-राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के अचानक फैसले से मोदी सरकार भी हैरान है. सूत्रों के मुताबिक सरकार का कहना है कि नजीब जंग पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं डाला गया था.
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नजीब जंग इस जिम्मेदारी से मुक्ति पाने के बाद अकादमिक क्षेत्र में जाएंगे और अमेरिका या सिंगापुर के किसी विश्वविद्यालय में पढ़ाने की सोच रहे हैं.
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आईएसएस अधिकारी रहे नजीब जंग रिटायर होने के बाद जामिया विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर बन गए थे और इस दौरान वह रंगमंच से भी काफी समय तक जुड़े रहे.
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यहीं से उनको 2013 में यूपीए सरकार ने दिल्ली का उप-राज्यपाल भी बनाया था. उनको यह जिम्मेदारी तेजेंदर खन्ना के रिटायर होने के बाद दी गई थी. हालांकि दिल्ली के उप-राज्यपाल पद के रूप में उनका कामकाज विवादों से भरा रहा है.
दिल्ली की केजरीवाल सरकार से उनकी कई मुद्दों पर सीधी लड़ाई थी. जिसमें दोनों ओर से बयानबाजी भी खूब हुई. अधिकारियों की नियुक्ति से लेकर ट्रांसफर सहित कई मुद्दे ऐसे थे जिसमें नजीब जंग ने फाइलों वापस कर दिया या फिर उनमें साइन करने से इनकार कर दिया.
दोनों पक्षों के बीच अधिकारों की लड़ाई कोर्ट तक जा पहुंची और इसी बीच केजरीवाल सरकार की ओर से उन्हें केंद्र सरकार का कठपुतली तक करार दे दिया गया.

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