नई दिल्ली. बिहार के बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मिलने से इंकार कर दिया है. इससे पहले गठबंधन को लेकर नीतीश कुमार रविवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिल चुके हैं.

माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच बिहार में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के दौरान गठबंधन को लेकर चर्चा हुई. कांग्रेस इस वक्त बिहार में जेडीयू सरकार को समर्थन दे रही है. बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने भी कहा है कि अगर सीटों का सही बंटवारा होता है, तो चुनाव में साथ उतरना चाहिए.

दूसरी तरफ खबर है कि इस मुलाकात से सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव बिहार के सीएम नीतीश कुमार से नाराज हैं. मुलायम चाहते हैं कि जनता परिवार का हर सदस्य कांग्रेस से दूर रहे. हालांकि, जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने मुलायम की नाराजगी वाली खबर को निराधार बताया है. उन्होंने कहा है कि कोई भी नेता किसी से भी मिल सकता है. 

सीएम पद के लिए आरजेडी-जेडीयू में टकराव

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जेडीयू और आरजेडी में अबतक नेतृत्व को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया. हालांकि ये साफ हो गया है कि दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे. रविवार को दिल्ली में मुलायम सिंह के घर हुई बैठक में लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों मौजूद थे. बैठक में फैसला लिया गया कि दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे के लिए कमेटी का गठन होगा. इस कमेटी में दोनों दलों से 3-3 सदस्य शामिल होंगे.

गठबंधन से पहले नीतीश ने खुद को प्रोजेक्ट किया सीएम

बिहार में गठबंधन का मुद्दा सुलझने से पहले ही नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा चुनाव उनके नाम पर लड़ा जाएगा. उनका चुनाव अभियान भी शुरू हो गया है. पटना के बहुचर्चित इनकम टैक्‍स चौराहे पर सीएम नीतीश की होर्डिंग नजर आई. इसमें एक स्‍लोगन लिखा हुआ है- आगे बढ़ता रहे बिहार, फिर एक बार नीतीश कुमार. 

सीएम कैंडिडेट पर सिद्दीकी ने भी ठोकी दावेदारी

आरजेडी और जेडीयू जारी खींचतान के बीच आरजेडी विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री की दावेदारी ठोक कर खलबली मचा दी है. सिद्दीकी ने साफ कहा है कि जब जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो वह क्यों नहीं बन सकते. आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह कह चुके हैं कि उनकी पार्टी के अंदर ही सीएम पद के कई उम्‍मीदवार हैं, फिर वे नीतीश के नाम क्यों चुनाव लड़ें.

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