नई दिल्ली. सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के कुनबे में चल रही कलह का पहला राउंड अभी पूरी तरह से खत्म भी नहीं हुआ कि दूसरा राउंड शुरू हो गया है. कलह के पहले राउंड में जहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल सिंह यादव आमने-सामने थे, वहीं अब शिवपाल और पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के बीच ठन गई है.
 
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शिवपाल ने दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनते ही रामगोपाल यादव के भांजे अरविंद प्रताप यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. अरविंद पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप भी लगा. शिवपाल और रामगोपाल के बीच के कलह की सबसे बड़ी वजह भी यही बतायी जा रही है.
 
 
हालांकि रामगोपाल और शिवपाल पहले से ही एक दूसरे के विरोध में खड़े हैं. हाल ही में जब मुलायम कुनबे में कलह मची थी तो उस समय शिवपाल रामगोपाल के विरोध में थे, क्योंकि रामगोपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ खड़े थे. रामगोपाल ने अपने एक बयान में कहा भी था कि अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाना पार्टी की गलती थी.
 
अब इस बगावत में रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव भी कूद पड़े हैं. उन्होंने अरविंद सहित 7 नेताओं को शिवपाल द्वारा बाहर का रास्ता दिखाने को लेकर नाराजगी जाहिर की है. अक्षय ने शिवपाल पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाते हुए कहा है कि शिवपाल के एक-एक फैसले का खामियाजा समाजवादी पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ेगा. वहीं अक्षय ने अखिलेश को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाने की वकालत करते हुए कहा कि अखिलेश के प्रदेश अध्यक्ष बने बिना 2017 का चुनाव जीतना मुश्किल है.
 
 
बता दें कि दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद शिवपाल ने सात नेताओं को बाहर किया है, जिनमें सुनील सिंह यादव (एमएलसी), अनांद भदौरिया (एमएलसी), संजय लाथर (एमएलसी), मोहम्मद ऐबाद (यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष), ब्रिजेश यादव (राज्य अध्यक्ष, समजावादी यवुजन सभा), गौरव दूबे (समाजवादी युवा सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष) और दिग्विजय (छत्र सभा के राज्य अध्यक्ष) शामिल हैं.