मऊ. चुनावी मौसम में दलित परिवार के घर जाकर भोजन करना राजनीति में फैशन बन गया है. लेकिन, वह घर कहां से नेताओं की आवभगत करता है, इससे उनका कोई सरोकार नहीं. ऐसा ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ‘किसान यात्रा’ के दौरान हुआ जब एक परिवार को राहुल गांधी को खाना खिलाने के लिए पड़ोसी से 10 किलो आटा उधार लेना पड़ा. 
 
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राहुल गांधी अपनी ‘किसान यात्रा’ के दौरान रविवार को मऊ स्थित बड़ागांव में रहने वाले बेहद गरीब स्वामीनाथ के घर खाना खाने गए थे. उनके साथ कांग्रसे के नेता गुलाम नबी आजाद भी मौजूद थे. 
 
स्वामीनाथ दैनिक मजदूर और घर में तीन बेटियां, बेटा और पत्नी है. राहुल गांधी को खिलाने के लिए उसके घर में आटा नहीं था. इसलिए वह पड़ोस से 10 किलो आटा उधार लेकर आया. लेकिन, चूल्हा जलाने के लिए ईंधन की समस्या सामने आ गई. तब बारिश में गीले हो गए बांस के टुकड़ों को जलाकर पत्नी रुकमणि ने रोटी और चोखा बनाया. 
 
उस गरीब की हालत यह थी कि राहुल और गुलाम नबी आजाद आजाद को खिलाने के लिए उसके पास टूटे-फूटे बर्तन थे. घर में बर्तनों के नाम पर महत पांच थाली, दो गिलास और एक चम्मच थे. 
 
सपा ने भी उठाया मौके का फायदा
अब कांग्रेस के अपनी राजनीति चमकाने के बाद यूपी की प्रमुख पार्टी सपा भी कहां पीछे रहने वाली थी. राहुल के खाना खाने के अगले ही दिन एक समाजवादी पार्टी नेता स्वामीनाथ को 25 हजार रुपये सहायता देने पहुंच गए. 
 
राहुल गांधी ने खाने के दौरान स्वीमाथ से पूछा कि परिवार का खर्च कैसे चलता है, बच्चे क्या करते हैं और उन पर कितना कर्ज है. स्वामीनाथ ने अपने कर्ज के बारे में बताया. उसने अपने ऊबड़-खाबड़ खेत को समतल बनाने के लिए 50 हजार रुपये कर्ज लिया था, जो 60 हजार रुपये तक पहुंच गया है. आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई है. 
 
 
इस गांव में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाया है. इस परिवार के पास न तो ढंग का आवास है, न शौचालय और न ही हैंडपंप. राहुल गांधी के जाने के बाद उसी गांव के रहने वाले और पीसीसी सदस्य राज कुमार राय के अलावा अन्य कोई बड़ा कांग्रेसी नेता फिर स्वामीनाथ के घर नहीं पहुंचा। हालांकि, स्वामीनाथ इसी बात से खुश है कि राहुल गांधी के घर आने से उसका अपने समाज में मान बढ़ गया है.